प्रदेश में स्वाइन फ्लू बेकाबू
पानीपत/राजधानी हरियाणा. हरियाणा में स्वाइन फ्लू अब बेकाबू होता जा रहा है। मंगलवार को सात और ताजा मामले मिले हैं। इनमें चार सोनीपत, दो अम्बाला तथा एक भिवानी में पाए गए हैं। नए मामले मिलाकर सोनीपत में स्वाइन फ्लू पीड़ितों की संख्या 13 तथा अम्बाला में चार होने के साथ ही प्रदेश में मरीजों की संख्या 667 पार कर गई।
हालांकि सोनीपत के सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने देर शाम तक सिर्फ तीन मरीजों की ही पुष्टि की थी। लेकिन प्रदेश की नोडल अधिकारी डॉ. अपराजिता ने इनकी संख्या चार बताई। एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ रहा है, लोगों को ज्यादा सर्तकता बरतने की जरूरत है।
अम्बाला में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (चंडीगढ़) के छात्र तथा एसडी पब्लिक स्कूल (छावनी) की ८वीं की छात्रा की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। सोमवार को दोनों के सैंपल लिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली से अम्बाला रिश्तेदारी में पहुंची एक महिला का भी सैंपल लिया है।
उधर, भिवानी के केएम पब्लिक स्कूल की चौथी की छात्रा साक्षी में स्वाइन फ्लू की पुष्टि राष्ट्रीय संक्रामक रोग जांच केंद्र (दिल्ली) ने सिविल अस्पताल प्रशासन को फैक्स के माध्यम से की है। उसे कुछ दिनों से खांसी—जुकाम था। डॉ. अपराजिता ने बताया कि टेमीफ्लू और फ्लूवीर सभी सेंटरों में भिजवा दी गई है। वे सिविल सर्जन के संपर्क में हैं, ताकि कहीं भी दवा की कमी न आए।
हालात क्या ?
अब तक 1108 संदिग्ध मामलों की जांच की गई है। इनमें 667 मामले पाजिटिव पाए गए तथा 49 मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। 563 मरीजों का इलाज घरों में ही किया गया। अभी 37 मरीजों का घर में इलाज चल रहा है। 667 में से 451 यानी 68.6 फीसदी मामले निजी लैब द्वारा पॉजिटिव घोषित किए गए हैं।
मार्च तक बरपेगा कहर
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रमेश छाबड़ा ने बताया कि इनफ्लूएंजा वायरस ठंड में ही बढ़ता है और तेजी से फैलता है। इस मौसम में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और फ्लू का वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाता है। मार्च तक मौसम ठंड रहेगा। इसके बाद गर्म हवा चलते ही एच1एन1 वायरस काफी हद तक समाप्त हो जाएगा। चूंकि गर्मी में यह ज्यादा विकसित नहीं होता।
घबराएं नहीं : भुक्कल
स्वास्थ्य मंत्री गीता भुक्कल ने अपील की है कि स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग सतर्क है व संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है। डीसी व शिक्षा अधिकारियों से अभिभावकों व शिक्षकों को एच1एन1 के रोकथाम उपायों के बारे में बताने का निर्देश दिया गया है। सरकार द्वारा लागू महामारी अधिनियम के तहत संदिग्ध केस का पता चलते ही निजी चिकित्सकों को संबंधित जिला के सिविल सर्जन को इस बारे में बताना होगा।
क्या है तैयारी
संदिग्ध मरीजों के साथ सतर्कता बरती जा रही है। लोगों को बीमारी से बचाव के उपाय के बारे में बताया जा रहा है। जिला इकाइयों से शीघ्र पहचान, परीक्षण व मरीजों को अलग रखने व उपचार के लिए तैयार किया गया है। गुड़गांव मंडल के लिए फरीदाबाद एवं गुड़गांव में, हिसार मंडल के लिए हिसार, रोहतक मंडल के लिए रोहतक तथा अम्बाला मंडल के लिए अम्बाला में दवाइयां एवं संरक्षण किट उपलब्ध करवाए गए हैं।
संदिग्धों की रिपोर्ट अभी बाकी
स्वाइन फ्लू के 14 संदिग्धों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। संभावना है कि बुधवार तक इनकी रिपोर्ट आ जाएगी। रिपोर्ट नहीं आने से संदिग्धों की सांसें अटकी है। हालांकि उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।
सीएमओ डा. एसएस पूनिया ने बताया कि अभी तक 101 सैंपल लिए गए हैं, इनमें से सात पाजिटिव और सिर्फ 14 की रिपोर्ट आना बाकी है। उन्होंने बताया कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूर बरतें।
इससे बचने सिर्फ यही एक हथियार है। सिविल अस्पताल में मंगलवार को आठ और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए। हालांकि जांच के लिए कई लोग आए थे, लेकिन सिर्फ संदिग्धों के ही सैंपल लिए गए। सीएमओ ने बताया कि संदिग्धों को एक हफ्ते से बुखार और खांसी है। इसीलिए इनके सैंपल लिए गए है।
स्वाइन के खात्मे के लिए हवन
स्वाइन के कहर को खत्म करने के लिए महिला आर्य समाज माडल टाउन की ओर से विशेष प्रकार की जड़ी-—बूटी से बनाई गई सामग्री का हवन कराया गया। यज्ञ में ऐंडट स्कूल के चार सौ बच्चों और आर्य समाज के सदस्यों ने हिस्सा लिया। आचार्य संजीव कुमार ने मंत्रों का उच्चरण करवाया।
यज्ञ के मुख्य यजमान महिला आर्य समाज माडल टाउन की प्रधान सुमित्रा अहलावत्त और समाजसेवी रविंद्र अहलावत की पत्नी बनी। सुमित्रा अहलावत ने बताया कि हवन यज्ञ से स्वाइन के वायरस खत्म हो जाएंगे। यज्ञ में विशेष रूप से जितेंद्र अहलावत्त, गुलशन नंदा, ईश्वर देवी, कांता नागपाल, प्रेम बतरा, प्रेम खुराना, महाजन, हरीश मुटनेजा और रविंद्र अहलावत्त उपस्थित रहे।
इन सामग्री का किया गया प्रयोग
नीम, तुलसी, बेल गिरी, मेवे, तिल, जौ, गुग्गल और लोबान का हवन सामग्री के रूप में प्रयोग किया गया।










