टिकिट के लिए घमासान
जबलपुर. नगरीय निकाय के चुनाव का टिकिट पाने के लिए घमासान मच गया है। शहर या वार्ड आरक्षित हो या अनारक्षित, टिकिट महापौर का हो या पार्षद का, ऐसा नजारा पहले हुए नगर निगम चुनावों में नहीं देखने मिला। भारतीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस अथवा तीसरा मोर्चा, हर पार्टी में टिकिट की ऐसी मांग है, जिसे कोई पूरा नहीं कर सकता। सिफारिशें भी ऐसी-ऐसी लग रही हैं कि चयनकत्र्ता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे, कितना वजन दें।
शहर के वार्ड अभी से सजने लगे हैं। टिकिट किसी को भी मिले कार्यकत्र्ता तैयार हैं, बस इशारे का इंतजार है। देखना यह है कि कौन कैसा इशारा करता है? दावेदार भी तैयार हैं। बायोडाटा और सिफारिशी पत्र पार्टी के पास पहुंच चुके हैं और अब फोन पर और व्यक्तिगत सिफारिशें की जा रही हैं।
हर किसी को हरी झंडी
जिस दावेदार से मिलो वही कहता है कि पार्टी आलाकमान ने कह दिया है कि जाकर तैयारी करो, यह कोई नहीं बताता कि तैयारी चुनाव लड़ने की करनी है या लड़वाने की? बहरहाल, हर दावेदार यह बता रहा है कि हरी झंडी मिल गई है और तैयारी में पोस्टर-बैनर छपने दे दिए गए हैं, घर-घर मुलाकात भी शुरू कर रहे हैं।
किसमें, कितना है दम
इस घमासान में यह देखने योग्य है कि टिकिट कौन ले पाता है? कोई संगठन की दम बता रहा है तो कोई मतदाताओं की, किसी को हाईकमान ने ओके किया है तो किसी को चयन समिति ने। भाजपा में तो वार्ड स्तर पर दौरे चल रहे हैं, वहीं कांग्रेस के दावेदार दिल्ली, भोपाल से चक्कर लगाकर लौटने की तैयारी में हैं।
पावर में : इन पर है दारोमदार
दोनों प्रमुख पार्टियों में टिकिट वितरण के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी तय हो गए हैं। सूत्रों का मानना है कि जो दावेदार जितने अधिक जिम्मेदार पदाधिकारियों को खुश करेगा, उसे उतना ही अधिक महत्व मिलेगा।
भाजपा
संगठन मंत्री अरविन्द मेनन, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी, सांसद राकेश सिंह, मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व सासंद जयश्री बैनर्जी, प्रभारी पर्यवेक्षक फग्गन सिंह कुलस्ते, नगर अध्यक्ष अनिल शर्मा और संबंधित विधायक।
कांग्रेस
प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी, केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ (महापौर चयन का दारोमदार), प्रदेश महासचिव अजय सिंह राहुल, चुनाव संचालन समिति सदस्य विश्वनाथ दुबे, तीनों पर्यवेक्षक एनपी प्रजापति, सुरेश चौधरी, लक्षमण ढोली और संबंधित विधायक।
भाजपा हो या कांग्रेस जिन पर भी टिकिट देने का दारोमदार है, दावेदार उनकी खिदमत में लगे हुए हैं। इसके लिए वे घर-घर जा रहे हैं या फिर दिल्ली- भोपाल में डेरा जमाए हुए हैं।
अब सामने आ रहे छिपे हुये दावेदार
भारतीय जनता पार्टी के नियुक्त पर्यवेक्षकों ने आज अलग-अलग वार्डो में बैठकें लीं। 35 पर्यवेक्षकों ने वार्डो में जाकर कार्यकर्ताओं की राय जानी और पूछा की कौन-सा उम्मीदवार अमुक वार्ड से जीत सकता है, यह पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट पार्टी को देंगे। बताया जाता है कि इस बैठक के बाद ऐसे नाम भी सामने आये हैं, जिन्होंने अभी तक टिकिट के लिए अपना नाम नहीं दिया था, पर इनके जीतने की पूरी उम्मीद है।
पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट को कितना महत्व दिया जायेगा यह आने वाला वक्त ही बतायेगा, पर पर्यवेक्षकों सामने कार्यकर्ताओं ने पूरी बात रखी। भाजपा द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक किस कार्यकर्ता को पार्षद का उम्मीदवार बनाया जाएं, इस पर चर्चा कर ही रहे हैं, साथ ही पुराने भाजपा के कार्यकर्ताओं और 27 मोर्चा प्रकोष्ठों से फीड बैक ले रहे हैं।
भाजपा पार्षद पद के लिए टिकिट देने के पहले हर तरह की छानबीन कर रही है। इसके पीछे मंशा भी यही है कि जीत सकने लायक और समर्पित कार्यकर्ता को टिकिट मिल सके। बुधवार से जिला स्तर पर किसे उम्मीवार बनाया जाए, इसकी कवायद भी शुरू होगी।
सूत्रों के अनुसार जिला स्तर पर दो दिनों के भीतर उम्मीवारों का नाम फाइनल कर लिया जायेगा और 20 की शाम तक सूची संभागीय समिति को दी जायेगी। संभागीय चयन समिति इसकी पूरी संभावना है कि 22 नवम्बर की शाम तक उम्मीदवारों की सूची घोषित कर देगी।










