एक साल बाद आबंटन, फिर भी 10 प्रतिशत
भीलवाड़ा. बजट के अभाव में गत सरकार के समय से अटकी पड़ी 121 जल सरंचनाओं के लिए किए गए सर्वे का नतीजा भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है। भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में एक साल से अटके 10 करोड़ 95 लाख के बदले सरकार ने एक करोड़ 10 हजार रुपए जारी किए हैं।
वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए भीलवाड़ा और चितौड़गढ़ में जलसंसाधन महकमे में बजट नहीं मिल पाने से पहले के 78 प्रोजेक्ट एक साल से अधर में अटके हुए हैं। इन कामों को पूरा करने के लिए 12 करोड़ रुपए से अधिक की आवश्यकता है। गत सरकार ने 2004 में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किया था। जर्जर पड़ी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का काम भी योजना में शामिल था। सरकार ने वर्ष 2007-08 में 8 करोड़ 18 लाख रुपए की मंजूरी दी।
लेकिन मुख्यालय से बिना कोई कारण बताए अघोषित रूप से राशि भेजना बंद कर दिया गया। 11 माह से तो एक पैसा भी नहीं भेजा गया। बजट स्वीकृति का पत्र गुरुवार को अधीक्षण अभियंता आबिद अली को मिला है। मगर इसमें भी चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा के लिए मात्र एक करोड़ रुपए 10 हजार रुपए की स्वीकृति मुख्य अभियंता कार्यालय ने जारी की है।
अल्प बजट बढ़ा सकता है परेशानी
जल संसाधन विभाग की ओर से जारी किया गया बजट राहत देने वाला कम और परेशानी बढ़ाने वाला ज्यादा साबित हो सकता है। दोनों जिलों में एक साल बाद पैसा आने के बाद ग्रामीण जहां अधूरी संरचनाओं को पूरा करने का दबाव बनाएंगे तो वहीं ठेकेदार अटका पैसा मांगने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाएंगे। बाकिायात का 10 प्रतिशत पैसा ही आने से किसी ठेकेदार को भुगतान कर भी दिया गया तो बाकी ठेकेदार विरोध में उतर सकते हैं।
चित्तौड़गढ़ जरूरत साढ़े चार करोड़, मिले 53 लाख
चित्तौड़गढ़ खंड प्रथम के स्वीकृत 125 में से 89 काम पूर्ण हो पाए। इन कामों के पेटे भी विभाग को एक करोड़ 25 लाख रुपए चुकाने हैं। जबकि उसे केवल 12 लाख रुपए थमाए जा रहे हैं। द्वितीय खंड के स्वीकृत 109 कामों में 3 करोड़ 25 लाख रुपए बाकी है। इस खंड के खाते में भी 40 लाख रुपए ही आएंगे।










