परिवार पालूं या बिल जमा कराऊं?
रोंपा. पति का साया उठे पांच वर्ष से भी अधिक समय हो गया है। मजदूरी करके पेट भरती है। साथ में तीन बाल बच्चों के भरण-पोषण की भी जिम्मेदारी है। घर पर मात्र एक बल्ब व ट्यूब लाइट जलती है। लेकिन, बिजली बिल राशि 1000-1200 रुपए आ जाती है।
यह दास्तान है पारोली के लक्ष्मीपुरा गांव में पाउर हाउस के पास रहने वाली जमीला बेवर सदीक मोहम्मद बिसायती की। जो हर दो माह में आने वाली बिजली की भारी भरकम राशि से परेशान होकर कनेक्शन कटवाने को मजबूर हो रही है।
जमीला ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते उसके घर का मीटर 50 मीटर की दूरी पर विद्युत पोल पर ही खुला लगा रखा है। जिससे संभवतया अन्य व्यक्ति भी दुरुपयोग कर बिजली लेते है। लेकिन खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है। इस बारे में विद्युत विभाग के आला अधिकारियों को भी अवगत कराया गया। लेकिन महज मीटर बदल कर खानापूर्ति कर दी गई। अब औसत के आधार पर बिल थमाया जा रहे हैं। जो भी न्यायसंगत नहीं है।
सितंबर 09 की बिल राशि 1030 तथा विद्युत उपयोग 250 यूनिट बता रखा है। नवंबर 09 की बिल राशि भी 1067.20 रुपए तथा उपभोग 250 यूनिट दर्शाया गया है। महिला का कहना है कि उसने बच्चों की पढ़ाई के लिए घर पर मात्र एक बल्ब व ट्यूब लाइट लगा रखी है। इसके बावजूद इतनी भारी भरकम बिल राशि आ रही है। अब संकट यह है कि वह परिवार का पालन-पोषण करे या फिर बिजली का नाजायज बिल जमा कराए।










