रतलाम में विकसित होगा कंटेनर हब
रतलाम. रेलवे मंत्रालय के उपक्रम कंटेनर कॉपरेरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने रतलाम को कंटेनर हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य बनाया है। कॉनकोर प्रबंधन की कोशिश अगले एक साल में रतलाम इनलैंड कंटेनर डिपो पश्चिम क्षेत्र का सर्वाधिक कंटेनर लोड अनलोड करने वाला डिपो बनाने की रहेगी।
यह जानकारी कॉनकोर के पश्चिम क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक बी.के. अग्रवाल ने भास्कर से चर्चा में दी। श्री अग्रवाल ने बताया कंटेनर हब बनने से सभी स्थानों से कंटेनर रतलाम आएंगे और यहां से बंदरगाहों और देश के अन्य हिस्सों में भेजे जा सकेंगे। वर्तमान में पश्चिम क्षेत्र के तुगलकाबाद और दादर में कंटेनर हब हैं।
श्री अग्रवाल ने बताया कॉनकोर के पूरे देश में कुल 58 डिपो हैं और 25 लाख कंटेनरों का परिवहन विश्वभर में होता है। अकेले 10 लाख कंटेनरों का परिवहन पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र के कंटेनर डिपो के माध्यम से होता है। पश्चिम क्षेत्र में द्रोणागिरी, मुलुंड, पीथमपुर, पूना व रतलाम में इनलैंड कंटेनर डिपो हैं। इनमें से द्रोणागिरी में सर्वाधिक 1 लाख कंटेनर की सालाना लोडिंग-अनलोडिंग होती है।
रतलाम डिपो में भी इतना पोटेंशियल है। ऐसा इसलिए कि डिपो रतलाम का दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग से जुड़ा होना है। इसके अलावा रतलाम सोयाबीन सहित अन्य कृषि उत्पादों का बड़ा उत्पादक जिला है जिससे यहां से बड़ी मात्रा में इनसे बने उत्पाद निर्यात होते हैं। भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, चंदेरिया, देवास, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, नागदा व इंदौर से जुड़ी लगभग 100 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं।
इन इकाइयों का अधिकांश माल रतलाम डिपो से भेजा जाएगा। अभी पीथमपुर से रतलाम कंटेनर आने और यहां से ट्रेन द्वारा बंदरगाहों तक जाने में करीब 15 दिन लगते हैं जबकि रतलाम डिपो शुरू होने के बाद अधिकतम 5 दिन में कंटेनर किसी भी बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे। दिल्ली-मुंबई डेडिकेटेड कोरिडोर और दिल्ली-मुंबई फ्रैट कोरिडोर से कंटेनर डिपो को लाभ होगा। यहां से गुजरने वाली मालगाड़ियों पर लदान से फायदा होगा।
ढाई से तीन करोड़ रुपए मासिक राजस्व मिलेगा- कंटेनर कॉपरेरेशन द्वारा 6 एकड़ (30,000 वर्ग मीटर) में इनलैंड डिपो विकसित किया गया है जिस पर करीब 15 करोड़ रुपए की लागत आई है।
करीब 5 करोड़ रुपए रेलवे ट्रैक बिछाने और जमीन अधिग्रहित करने में हुआ जबकि 10 करोड़ का व्यय पूरे परिसर को विकसित करने में। इस कंटेनर डिपो से 90 कंटेनर का एक रैक जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह भेजने पर रेलवे को करीब 9 लाख रुपए मिलेंगे। कस्टम डच्यूटी और अन्य खर्च अलग। कॉपरेरेशन के अनुमान के मुताबिक रतलाम डिपो से उसे ढाई से तीन करोड़ रुपए का राजस्व प्रतिमाह मिलेगा।
आज होगा उद्घाटन- रतलाम इनलैंड कंटेनर डिपो का शुभारंभ 18 नवंबर को होगा। शुभारंभ सुबह 11 बजे होगा। शुभारंभ मंडल रेल प्रबंधक संजय के. पाठक, कस्टम कमिश्नर जी. आर. मीणा व कॉनकोर के डायरेक्टर यशवर्धन करेंगे।
इन क्षेत्रों को होगा लाभ
दुनिया के किसी भी देश के लिए रतलाम से और यहां से किसी भी देश के लिए कंटेनर की बुकिंग हो सकेगी।
कंटेनर डिपो से उत्पादों का आयात-निर्यात तेज गति से होगा।
कस्टम एजेंट और उद्योगों के प्रतिनिधियों सा रतलाम में जमावड़ा होने से होटल व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
कंटेनरों की लोडिंग-लोडिंग होने से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय फलेगा-फूलेगा।
वेयरआउस से सामान की लोडिंग-अनलोडिंग से काम करने वालों की मांग बढ़ेगी।
कम समय में कंटेनर बंदरगाह और उसके बाज समुद्री मार्ग से विश्व के किसी भी देश भेजे जा सकेंगे।
बाहर से लोगों की आवाजाही से शहर की अर्थव्यवस्था सुधरेगी।
कृषि उत्पादों का निर्यात होने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।










