Wednesday, Nov 18th, 2009, 9:01 am [IST]  

danik bhaskarगांवों की गणित ने अफसरों को उलझाया

भास्कर न्यूज

अजमेर. शहर को आनन—फानन में नगर निगम का दर्जा तो मिल गया लेकिन शहरी सीमाओं के सवाल ने नगर निगम को चक्करघिन्नी बना दिया है। हालत यह है कि आम आदमी तो दूर, निगम व प्रशासन के अफसर भी दावे के साथ नहीं कह सकते कि शहर की सीमा में कौन से गांव शामिल है।



पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की घोषणा के बाद 30 जनवरी 08 को स्वायत शासन विभाग ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर नगर निगम की सीमाएं तय कर दीं। इसके तहत शहर के समीपस्थ 11 ग्राम पंचायतों के 16 गांवों को निगम में शामिल कर लिया। हालांकि ये गांव नगर निगम में शामिल होने को तैयार नहीं हैं और पिछले पौने दो साल से उनका विरोध बरकरार है।




पंचायतें बेहाल
पंचायतीराज विभाग की गत 10 नवम्बर को जारी अधिसूचना और स्वायत्त शासन विभाग की जनवरी 08 में जारी अधिसूचना में काफी विरोधाभास है। स्वायत शासन विभाग ने तबीजी, दौराई व सोमलपुर ग्राम पंचायतों को निगम सीमा का हिस्सा माना है वहीं पंचायतीराज महकमे ने इन तीनों को पुष्कर नगर पालिका का हिस्सा बताया है।



उधर, स्वायत शासन विभाग ने ही अधिसूचना जारी कर देवनगर ग्राम पंचायत के कानस व नेडलिया गांव को पुष्कर पालिका में शामिल किया है और 23 नवम्बर को वहां पालिका के चुनाव भी होने वाले हैं। लेकिन सोमलपुर, दौराई व तबीजी ग्राम पंचायतों का क्या होगा यह अफसर भी नहीं जानते।




पंचायतीराज के वार्ड कौनसे?
पुष्कर पालिका अजमेर नगर निगम के नए सीमांकन के आधार पर पिछले दिनों अगले वर्ष प्रस्तावित पंचायतीराज चुनावों के मद्देनजर जिला परिषद, पंचायत समिति के नए वार्डो का गठन कर दिया गया है। इन वार्डो में से अजमेर नगर निगम तथा पुष्कर पालिका में शामिल गांवों को बाहर निकाल दिया गया है।



इनमें रसूलपुरा, सेंदरिया, नारेली, घूघरा, माकड़वाली तथा हाथीखेड़ा ग्राम पंचायत सीमा तो पूरी तरह निगम में समाहित हो चुकी है। जबकि चाचियावास का लोहागल, पालरा का किरानीपुरा क्षेत्र भी निगम में शामिल है। इन पंचायतों के शेष गांव पंचायतीराज का हिस्सा ही रहेंगे।



गवारड़ी गांव या शहर ?
स्वायत शासन व पंचायतराज की अधिसूचनाओं के तहत हुए नगर निगम के सीमांकन में विरोधाभास के कारण सबसे अजीब स्थिति रसूलपुरा ग्राम पंचायत के गुवारड़ी गांव की हुई है। जनवरी 08 की अधिसूचना में इस गांव को शहर की सीमा से बाहर माना गया है।



इसी के आधार पर पंचायत के नवगठन में गुवारड़ी को अजयसर का हिस्सा माना गया है। इसके उलट पंचायती राज महकमे की नई अधिसूचना में गुवारड़ी को अजमेर निगम का हिस्सा मान लिया गया है। ऐसे में गुवारड़ी के लोग फिलहाल न तो गांव में ही रहे और न ही शहर में, तो फिर जाएंगे कहां?

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