गुजरात के मुस्लिम साक्षरता में अव्वल
गांधीनगर.
सामान्यत: मुस्लिम वर्ग को अल्प शिक्षित माना जाता है लेकिन जमीनी सच्चई इससे अलग है। गुजरात में साक्षरता के मामले में इस अल्पसंख्यक समाज ने बहुसंख्यक समाज को पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं तीन वर्ष की अवधि में मुस्लिम समाज ने शिक्षा प्रसार में करीब 14 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है, जो हिंदू समाज के प्रसार से दो गुने से भी अधिक है। भारत सरकार के संशोधित आंकड़े भी दर्शा चुके हैं कि मुस्लिम समाज शिक्षा को लेकर जागृत हो रहा है।
इधर, गुजरात के हालिया सर्वेक्षण में हिंदुओं की साक्षरता दर ७९.क्१ के मुकाबले मुस्लिमों की साक्षरता दर ८२.क्९ प्रतिशत आई है। तीन वर्ष पहले स्थिति क्रमश: मुस्लिमों में साक्षरता का प्रमाण ६८.३१ प्रतिशत था। मतलब 13 महज तीन वर्ष की अवधि में 13.78 प्रतिशत का उछाल अर्जित किया है। वहीं हिंदू समाज में साक्षरता का प्रसार सिर्फ 5.54 प्रतिशत रहा। 1991 की जनगणना के मुकाबले 2001 में परिवर्तनशील स्थिति सामने आई थी लेकिन 2009 के अनुमानित आंकड़ों में बड़े पैमाने पर अंतर होने के संकेत मिल रहे हैं।
अन्य एक नजर में : सर्वाधिक साक्षरता में जैन समाज अव्वल है। सिख एवं ईसाई धर्मावलंबियों में साक्षरता दर काफी ऊंची है। हालांकि जनसंख्या के प्रमाण के अनुसार इनकी तुलना नहीं की जा सकती। अहमदाबाद शहर के सिखों की साक्षरता दर 92 प्रतिशत है। गांधीनगर में रह रहे ईसाई धर्मावलंबी 98 प्रतिशत एवं साबरकांठा के बौद्ध धर्मावलंबी शतप्रतिशत शिक्षित हैं।
देश में केरल शीर्ष पर: इस दस्तावेज के अनुसार केरल 91.01 प्रतिशत साक्षरता के साथ केरल देश में शीर्ष स्थान पर है। मिजोरम व गोवा क्रमश: दूसरे-तीसरे स्थान पर काबिज हैं। देश में गुजरात का स्थान 14वां हैं।
इनमें भी आगे अल्पसंख्यक: जनसंख्या नियंत्रण के ताजा आंकड़ों के अनुसार गुजरात ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा एवं तमिलनाडु के मुस्लिमों में साक्षरता दर ऊंची पाई गई है।










