डीएनए मॉडल बैंक बनेगा गांधीनगर में
अहमदाबाद केंद्र सरकार ने नेशनल डीएनए बेज मॉडल डाटा बैंक बनाने का प्रोजेक्ट गुजरात की गांधीनगर एफएसएल को सौंपा है। प्रोजेक्ट के लिए प्राथमिक चरण में 1.40 करोड़ रुपए का आवंटन भी किया गया है। प्रस्तावित बैंक को केंद्र के बहुप्रचारित फोरेंसिक साइंस बिल का हिस्सा माना जा रहा है। गांधीनगर एफएसएल द्वारा तैयार मॉडल बैंक प्रारूप को बाद में पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रोजेक्ट के प्रभावी होने के बाद देशभर में डीएनए सहित सभी वैज्ञानिक परीक्षणों की प्रक्रिया एक समान हो जाएगी। अभी ऐसा नहीं है।
गांधीनगर एफएसएल प्रस्तावित नेशनल डीएनए बेज लैब के ढांचे, इसकी जरूरतें, कार्यपद्धति तथा भावी विकास आदि के बारे में मॉडल तैयार करेगी। राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात एफएसएल की साख को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी इस एफएसएल को सौंपी है। ज्ञात हो नोएडा के निठारी हत्याकांड सहित कई राष्ट्रीय-राज्यस्तरीय मामलों में इस एफएसएल द्वारा दी गई रिपोर्ट आन-रिकॉर्ड है।
गांधीनगर एफएसएल सूत्रों के अनुसार संस्थान दो विदेशी एवं पांच स्थानीय शोधार्थी, विशेषज्ञों एवं संस्थान की प्रयोगशाला के विशेषज्ञों की मदद से मॉडल बैंक की रूपरेखा तैयार करेगा। डीएनए व फिंगरप्रिंट लैबोरेटरी की कार्यपद्धति में समानता की वजह से संस्थान को इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वैसे देश के सात राज्यों के पास डीएनए -फिंगरप्रिंट लैबोरेटरी है लेकिन इनकी कार्यपद्धति में समानता नहीं है। हाल ही में राजस्थान में संपन्न फोरेंसिक साइंस कांफ्रेंस में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में फोरेंसिक साइंस के लिए 300 करोड़ का प्रावधान करने की बात कही थी।










