जल की एक-एक बूंद का करें उपयोग
जयपुर रोड स्थित कृषि विभाग के कार्यालय पर मंगलवार को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जल की एक बूंद को उपयोग में लाने का व्यवहारिक व प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण शिविर में उपखंड के विभिन्न क्षेत्रों से 30 किसानों ने भाग लिया। कार्यकारी सहायक कृषि अधिकारी पवन कुमार पारीक ने बताया कि कृषि विभाग के आदेशानुसार जल की गिरती स्थिति से किसानों को अवगत कराने तथा जल की बूंद-बूंद का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया।
किसानों को फव्वारा सिस्टम का अवलोकन कराया गया। सेवानिवृत्त कृषि अधिकारी घनश्याम सोनी ने बताया कि हमें हमारी मिट्टïी में तीन वर्ष बाद नमी बनाए रखने के लिए जीप्सम डालना चाहिए। जहां तक हो सके प्रत्येक फसल के बाद देशी खाद डालना चाहिए। इससे मिट्टïी में नमी बनी रहती है।
इससे फसलों को सिंचाई की कम आवश्यकता पड़ती है। कृषि पर्यवेक्षक वासुदेव बारहठ ने बताया कि हमें हमारे मौसम को ध्यान में रखते हुए अपने खेत में पानी के एकत्रीकरण के लिए जल टांके बनाने चाहिए।
इससे भी खेत की नमी बनी रहती है। बारहठ ने बताया कि हमें सरकार द्वारा समय समय पर उपलब्ध कराई जा रही योजनाओं व सूचनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में दिए जाने वाले अनुदान का लाभ उठाना चाहिए।
फव्वारा पर अनुदान
कृषि पर्यवेक्षक सुरेश सोलंकी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा ड्रीप व फव्वारा सिस्टम लगाने पर 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। सोलंकी ने बताया कि एक हेक्टेयर पर फव्वारा सेट लगाने पर 7 हजार एक सौ पचास रुपए अनुदान दिया जाएगा। 20 फुट के 30 पाइप, 10 फुट का एक पाइप, पांच नोजल बेंड, 1 बंद पलक किसानों को दिए जाएंगे तथा ड्रिप सिस्टम लगाने पर 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
यहां से आए किसान
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए बरना, भुवाड़ा, सांवतसर, रलावता, काली डूंगरी, शिवाजी नगर, मालियों की बाड़ी, नयागांव, टिकावड़ा व अन्य क्षेत्रों से किसान आए।
दिया उत्तर, पाया इनाम
एक दिवसीय कृषि प्रशिक्षण शिविर में कृषि अधिकारी पवन पारीक व वासुदेव बारहठ ने किसानों से प्रशिक्षण पर आधारित प्रश्न पूछे। मालियों की बाड़ी के रामदेव माली, नयागांव के लालचंद गुर्जर तथा गुजरवाड़ा के रामकरण गुर्जर ने सही उत्तर देकर इनाम पाया। इस अवसर पर मौजूद किसानों ने बताए अपने विचार।
]ञ्चयहां जानकारी अच्छी दी गई। जब हम इनका प्रयोग अपने खेतों में करेंगे तो पता चलेगा कि हमें सफलता मिलती है या नहीं।ज्ज्
रामकरण गुर्जर, मालियों की बाड़ी
ञ्चजल उपयोगिता की जानकारी दी गई। इससे पानी की बचत होगी। मौसमी बिमारियों से बचाव की जानकारी दी गई। इससे लाभ होगा।ज्ज्
छीतरमल माली, शिवाजी नगर
ञ्चसरकारी अनुदान के बारे में जानकारी मिली। मिट्टïी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए बहुत अच्छी अच्छी जानकारी मिली।ज्ज्
छीतरमल सेन, बरना
ञ्चकिसानों को व्यवहारिक व प्रायोगिक दोनो प्रकार की जानकारी दी गई। सार्थकता तभी होगी जब प्रयोग अपने खेत पर करेंगे।ज्ज्
घनश्याम सोनी, प्रशिक्षक










