एनपीवी जमा न होने से रुका काम
शिमला. नेट प्रेजेंट वेल्यू (एनवीपी)जमा नहीं करवाने के चलते प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली 102 सड़कों का निर्माण लटक गया है। लोक निर्माण विभाग को इन सड़कों के लिए करीब 24 करोड़ की आवश्यकता है। प्रदेश सरकार ने एनपीवी के संदर्भ में केंद्र सरकार को पत्र भेजा है।
इससे पहले मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और लोनिवि मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर भी केंद्र के समक्ष इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। एनवीपी जमा नहीं करवाने के चलते मंडी जिला में सबसे अधिक 29 और डलहौजी क्षेत्र में 27 सड़कें रुकी हैं। शिमला जिले में 12 ऐसी सड़कें हैं जिन पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
राज्य सरकार ने जमा करवाया 15 करोड़
केंद्र से कोई राशि नहीं मिलने पर कुछ माह पहले राज्य सरकार ने करीब 15 करोड़ नेट प्रेजेंट वेल्यू जमा करवाई। यह राशि जमा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की 81 सड़कें फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट के चंगुल से छूटी हैं। लोनिवि ने कई सड़कों का निर्माण शुरू कर दिया है। सड़क निर्माण के लिए केंद्र पहले ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत रकम जारी कर चुका है।
क्या है नेट प्रेजेंट वेल्यू
वन क्षेत्र से होकर सड़क गुजरने और पेड़ों को नुकसान होने पर वन विभाग सड़क निर्माण से होने वाले नुकसान का आकलन करता है। इसे एनपीवी कहते हैं। जंगल को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग लोनिवि से एनपीवी जमा करवाता है। एनपीवी के रूप में जमा हुई राशि को कैंपा में जमा करवाया जाता है। कैंपा की रकम बाद में वन विभाग को रिलीज की जाती है। इस राशि का उपयोग पौधरोपण और वन संरक्षण के लिए होता है।










