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Thursday, Nov 19th, 2009, 1:21 am [IST]  

danik bhaskarपेपर पैटर्न को लेकर स्टूडेंट्स असमंजस में

मोहित सक्सेना

फरीदाबाद. इन दिनों कालेज कैंपस में परीक्षाओं की तैयारियों का माहौल है। कालेज में छात्र अपना कोर्स खत्म करने में लगे हुए है। पहली बार परांपरिक कोर्स में सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं ली जाएंगी। जिसके कारण इन दिनों छात्रों के बीच पेपर पैटर्न को लेकर शंका बनी हुई है।



उनका कहना है कि अभी तक कालेज में पेपर का ब्लू प्रिंट सामने नहीं आया है। जिससे पेपर की रुपरेखा का पता चल सके। वहीं लेक्चर्स की भी शिकायत है कि यूनिवर्सिटी की तरफ से पैटर्न को लेकर कोई भी जानकारी अभी तक नहीं मिली है।



उनका कहना कि हर साल यूनिवर्सिटी की तरफ से पेपर में होने वाले बदलाव की जानकारी उन्हें सही समय पर नहीं मिलती पाती है। उनका कहना है कि परांपरिक कोर्स में पहली बार सेमेस्टर सिस्टम के तहत पेपर आने हैं मगर इसकी रूपरेखा की जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।



8 दिसंबर से शुरू होने वाली परीक्षाआंे के लिए छात्रों की धड़कनें तेज हो गई हंै। कैंपस में छात्र अब अपना अधिकतर समय कालेज लाइब्रेरी में बिताने लगे हैं। किताबों को लेकर छात्रांे के बीच होड़ लगने लगी है।



क्या कहते हैं स्टूडेंट्स



नेहरू कालेज में बी.काम के छात्र संतोष शर्मा का कहना है कि इस बार कोर्स में सेमेस्टर सिस्टम तो शुरू कर दिया गया है। मगर पेपर कैसा आएगा, किस तरह के प्रश्न होंगे इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इसलिए खाली समय मिलते ही वह लाइब्रेरी में जरूरी नोटस और किताबों का अध्ययन करने में लगे रहते हैं।



बीबीए के छात्र राहुल मेहरा का कहना है कि परीक्षा का समय करीब आ गया है मगर अभी तक पेपर के तरीके को लेकर उन्हें कुछ पता नहीं है। पेपर में प्रश्नों की नंबरिंग और इसकी लंबाई के बारे में अभी तक जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना कि कक्षा में लेक्चर्स अपनी तरह केपरीक्षाओं का विशलेषण कर रहे हंै।



कोई कहता है कि पेपर पुराने र्ढे पर ही आने हैं तो कोई कहता है पेपर में प्रश्नों की नंबरिंग में कुछ बदलाव आ सकते हैं। बीएससी के छात्र राहुल, रितेश और अनुराग का कहना है कि सेमेस्टर परीक्षाआंे की तैयारी के लिए अब एक माह भी शेष नहीं रहा गया है।



गणित के पेपर में दिए गए सिलेबस में किस तरह का बदलाव आ सकता है इसका कोई अंदाजा नहीं है। पेपर 45 अंक का आना है। मगर दिए गए सिलेबस में कौन सा पाठ ज्यादा महत्वपूर्ण है इसका पता नहीं चल पा रहा है।



नेहरूकालेज की प्रिंसिपल इंदु दहिया का कहना है कि इस समय सेमेस्टर को लेकर पेपर पैटर्न के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परीक्षाओं में तारीख भी पुरानी बनी हुई है। जिसमें 8 दिसंबर को ही परीक्षा का समय समझा जा रहा है।



अंग्रेजी के बड़े प्रश्न हो सकते हैं कम



परीक्षाओं मंे अंग्रेजी का पेपर खास हो सकता है। बी.काम और बीएससी कोर्स में इसे बिजनेस कम्युनिकेटिव इंग्लिश के तौर पर पढ़ाया जा रहा है। जिस कारण पेपर में लम्बे प्रश्न कम हो सकते है। नेहरू कालेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर अतुल शुक्ला का कहना है सेमेस्टर सिस्टम में अंग्रेजी के पेपर में बी.काम और बीएससी के छात्रों के लिए लेंग्थी प्रश्नों की बजाय छोटे प्रश्न अधिक हो सकते है।



अंग्रेजी को बिजनेस विषय से जोड़ने के बाद पेपर में लेटर, ग्रामर और अनसीन पैसज को अधिक अंक मिल सकते हैं। उनका कहना है कि छात्रांे को प्रैक्टिकल प्रश्नों की तैयारी अधिक करनी चाहिए। क्योंकि ये स्कोरिंग हो सकते हैं। इसके अलावा चैप्टर से संबंधित प्रश्न भी स्कोरिंग हैं।



उनका कहना है कि अंग्रेजी की तैयारी में छात्रों को रटने की बजाय उसे समझकर याद करना चाहिए। प्रश्न पत्र मिलते ही सबसे पहले उन प्रश्नों को पहले छूना चाहिए जो स्कोरिंग और हल करने में आसान हों। उनका कहना है कि प्रश्नों को अपनी भाषा में लिखना और सब हेडिंग में बांटना ज्यादा अंक दिला सकता है।



अंग्रेजी पेपर में हर प्रश्न का उत्तर की उसकी नंबरिंग के हिसाब से देना चाहिए। प्रश्नों का उत्तर न ज्यादा बढ़ा हो न ज्यादा छोटा। उत्तर में सभी बातों को ध्यान मंे रखकर लिखना चाहिए। प्रoA के उत्तर के लिए सभी को अपने दिमाग में प्वाइंट बना कर उसके उत्तर की रूपरेखा तैयार करना चाहिए। जिससे चेकिंग के दौरान एग्जामिनर को जांचने में समय न लगे और उसे हर प्वाइंट सामने दिखे। इससे मार्किग में आसानी होती है।

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