करोड़ों रुपए की जमीन बेच मालामाल हुआ निगम
फरीदाबाद. नगर निगम के अधिकारियों ने बुधवार को करोड़ों रुपए के प्लाट साइटस नीलामी में बेच दिए। इस नीलामी से नगर निगम की कंगाली कुछ हद तक कम हो गई। निगम सभागार में आयोजित नीलामी में नगर निगम के तीनों ज्वाइंट कमिश्नर, चीफ टाउन प्लानर, वित्त नियंत्रक, डीटीपी एटीपी सहायक आर्किटेक्ट सहित पार्षद दयाचंद यादव एवं शुचि पराशर मौजूद थे। एकाउंट विभाग से एओ तथा एएओ भी अंत तक मौजूद रहे।
सुबह ग्यारह बजे से प्रारंभ हुई नीलामी की प्रतिक्रिया देर शाम समाचार लिखने तक जारी थी। फरीदाबाद शहरी क्षेत्र में स्थित वाणिज्यिक, औद्योगिक, शैक्षणिक स्थलों के अलावा छोटे-छोटे शेड भी नीलामी में शामिल किए गए थे। तिकोना पार्क में सीमेंट की चद्दरों से बने सात गज व साढ़े छह वर्ग गज के ये शेड सात लाख रुपए से दस लाख रुपए प्रति शेड के हिसाब से बिके।
तिकोना पार्क का शेड नंबर चार 95, 500 रुपए प्रति गज में बिका तो शेड नंबर-38 एक लाख 53 हजार 200 रुपए प्रति गज की बोली पर बेचा गया। पूर्व रणजी क्रिकेट खिलाड़ी संजय भाटिया ने प्ले स्कूल के क्षेत्र में कदम रखते हुए अरावली टीपी स्कीम नंबर एक में सेक्टर-49 स्थित प्राथमिक स्कूल स्थल की लगभग पौने एकड़ से कुछ अधिक जमीन तीन करोड़ से भी अधिक बोली लगाकर अपनी फर्म एडवांस लैंड बैस प्रा. लि के नाम कराने में सफलता पाई।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच संजय भाटिया ने यह जमीन ले ही ली। प्रगति बिहार सेक्टर-59 में स्थित दो औद्योगिक प्लाट 17 हजार 200 रुपए प्रति गज के हिसाब से बेचे गए। 668 वर्ग गज के इन प्लाटों की सरकारी बोली 12 हजार रुपए प्रति गज बताई गई थी। सेक्टर-52 स्थित एक प्राथमिक स्कूल स्थल की बोली को रद्द कर दिया गया।
देर शाम लगभग सात बजे तक प्लाटों की नीलामी का काम जारी रहा। इस मौके पर ज्वाइंट कमिश्नर मुकेश कुमार सौलंकी ने बोलीदाताओं को ऊंची बोली बोलने की प्रेरणा देते हुए तिकोना पार्क के शेडों की तुलना मिनी कनाट प्लेट से की। वहीं चीफ टाउन प्लानर एससी कुश व डीटीपी इंफोर्समेंट सतीश पराशर भी बोली देने वालों को प्लाटों की खासियत बताकर दाम बढ़वाते रहे।
कंगाली से जूझ रहे निगम को मिले करोड़ों
वर्ष 2009 में जून माह के बाद कंगाली से जूझ रहे निगम को जमीन बेचकर करोड़ों रुपए की आमदनी होना कोई नई बात नहीं हैं। पहले भी हाथ तंग होने पर निगम यहां-वहां पड़ी जमीनों को बेचकर अपनी कंगाली दूर करने का प्रयास करता रहा है। वैसे जमीनों को बेचकर कर्मचारियों की सैलरी का जुगाड़ तो हो जाता है। मगर निगम अपनी करीब 90 करोड़ की देनदारियों को कैसे निपटाएगा, यह एक सोचनीय प्रश्न है।



