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Thursday, Nov 19th, 2009, 1:40 am [IST]  

danik bhaskarईश्वर ने आंखें छीनीं, मां ने बेसहारा छोड़ दिया

अनीता भाटी

faridabadफरीदाबाद. एक तो ईश्वर ने ही उसकी किस्मत में जन्म से विकलांगता लिख दी थी, बाकी कसर उस मां ने पूरी कर दी जिसने उसे नौ माह कोख में रखकर जन्म दिया और दो महीने तक अपनी मासूम बच्ची का दर्द महसूस भी किया।



मासूम की विकलांगता ही मासूम के लिए अभिशाप बन गई और मां ने उसे एनआईटी के एक मंदिर में ईश्वर के रहमो-करम पर छोड़ दिया। मंगलवार को तिकोना पार्क स्थित मां वैष्णों देवी मंदिर में मिली लगभग दो माह की मासूम बच्ची की आंखे जन्म से ही खराब बताई जा रही है।



इस मासूम को तो यह भी नहीं पता कि वो अब मां के आंचल में नहीं बल्कि अस्पताल में डॉक्टर व नर्स की आश्रय में रह रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी बच्ची के अभिभावकों की तलाश की जा रही है।



अगर बच्ची के माता-पिता का पता नहीं चला तो सभी आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करके बच्ची को पंचकूला स्थित अनाथ आश्रम में भिजवा दिया जाएगा। समय शाम 6.30 बजे का था। मां वैष्णों देवी मंदिर में सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी केबीच मां की आरती की जा रही थी।



आरती समाप्त होते ही लोगों को एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। लोगों ने जाकर देखा तो वहां गर्म शॉल में लिपटा हुआ एक बच्च कोने में पड़ा हुआ था। मंदिर प्रबंधन के लोगों ने तुरंत एनाउंसमेंट कराया लेकिन कोई भी व्यक्ति बच्ची का हाथ थामने नहीं आया। मौके पर तुरंत पुलिस पहुंच गई और बच्ची को बादशाह खान अस्पताल पहुंचाया गया।



मजबूरी के साथ दिखा मां का प्यार



मंदिर प्रबंधन के अधिकारियों का कहना था कि बच्ची की हालत देखकर लग रहा था कि वो बहुत गरीब घर से संबंध रखती है। माता-पिता ने बच्ची की शारीरिक विकलांगता को देख उसे मां दुर्गा की शरण में छोड़ दिया। बच्ची के साथ एक दूध की बोतल और 41 रुपए रखे थे।



क्या कहते हैं डॉक्टर



बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विकास गोयल का कहना है कि बच्ची की आंखों का रैटिना खराब है। जबकि मूंह में तालू भी विकसित नहीं है। जिससे बच्ची को दूध पीने में परेशानी हो सकती है।



क्या कहते हैं पीएमओ



पीएमओ एस.एन शर्मा का कहना है कि अभी पुलिस बच्ची के अभिभावकों की खोज-बीन कर रही है। अगर बच्ची के अभिभावकों का पता नहीं चलता है तो उसे पंचकूला अनाथालय भिजवा दिया जाएगा।



इस वर्ष अब तक छह नवजात बच्चे मिले हैं लावारिस



वर्ष 2009 में अब तक छह नवजात बच्चे लावारिस हालात में मिल चुके हैं। एक अनुमान के तहत जिले में हर वर्ष 8-10 बच्चे लावारिस अवस्था में मिलते है।



20 सितंबर बल्लभगढ़ स्थित सिटी पार्क में एक नवजात बच्ची बुखार से पीड़ित लावारिस अवस्था में मिली।



25 सितंबर को दस दिन की नवजात बच्ची एक राहगीर को मिली।



25 अक्टूबर एनआईटी-3 स्थित पार्क में एक नवजात बच्ची नरेश कुमार को मिली।



मजबूरी में यह कदम उठाया



21 मार्च को एनआईटी के सुनसान इलाके एक नवजात बच्ची मिली।



3 मई को एक महीने की बच्ची रास्ते में मिली।



17 नवंबर तिकोना पार्क स्थित मां वैष्णों देवी मंदिर में मिली दो माह की बच्ची।

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