प्राचीनता और आधुनिकता का अनूठा संगम
भोपाल. मप्र हस्त शिल्प हथकरघा विकास निगम द्वारा मृगनयनी में फर्नीसिंग शो का शुभारंभ बुधवार दोपहर एक बजे किया गया। इस शो की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्राचीनता के साथ आधुनिकता की कड़ी को जोड़ते हुए वर्तमान समय में लोगों के पसंद और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गृह सज्जा से लेकर दैनिक उपयोग के कपड़ों का संग्रहण है।
नजाकत और नफासत के लिए मशहूर चंदेरी के शबनम के ओस की बूंद की तरह सुंदर जड़ी-गोटे लगे हुए पर्दे भी यहां उपलब्ध हैं।फर्नीसिंग के लिए एक ओर जहां खरगोन जिले के महेश्वर में निर्मित राजसी जालीदार पर्दे पर उच्चतम तकनीक से बुनाई की गई है वहीं आधुनिक और पुरानी तकनीक का प्रयोग करते हुए प्राकृतिक रंगों का बेहतरीन प्रयोग किया गया है।
इन पर्दो का निर्माण ब्रिटिश पैटर्न को ध्यान में रखकर किया गया है। कुदरती चिकनाहट और मौसम के अनुकूल ये पर्दे सर्द मौसम में घरों में लगाने पर गर्माहट का अहसास देने के अलावा आंखों को सकून भी देते हैं। ये पर्दे गहरे नीले, मेहरून, लाल, क्रीम, चंदन आदि रंगों के है। राज्य सरकार के द्वारा इन पर ३५एवं अन्य आइटम्स पर २क् प्रतिशत छूट देने देने से ये बाजार से कम कीमत पर यहां उपलब्ध हैं।
फर्नीसिंग आइटम्स के अलावा कादम्बरी, लिन्डा और पराना के गादीपाट के कपड़े भी हैं जो पर्दे से लेकर सलवार-कुर्ते के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। वहीं घीचा कपड़ा जिससे कि नेहरू जैकेट की शुरुआत हुई थी, जिसकी बुनावट और रंगों का चयन देखते ही बनता है। इसमें मालवा और निमाड़ की संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। साथ ही महिलाओं के लिए हथकरघा से निर्मित हैंडलूम व शिफॉन की साड़िया देखते ही बनती हैं।
शुद्धता की गारंटी के लिए इस पर न केवल होलोमार्क लगाए गए हैं बल्कि अत्यंत ही सावधानी से इसका निर्माण किया गया है। साथ ही प्रमाणिकता के लिए नंबरिंग भी की गई है। जो प्रत्येक आइटम के साथ बदल जाती है।
लेकिन वर्तमान समय के लोगों के पसंद को देखते हुए इसमें फैशन डिजाइनर की भी मदद ली गई है। साथ ही बाघ प्रिंट के चादर, बेडशीट से लेकर भोपाल की विरासत के नाम से मशहूर जड़ी वाला बटुआ भी उपलब्ध है। यह शो ३क् नवंबर तक चलेगा।










