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Thursday, Nov 19th, 2009, 2:27 am [IST]  

danik bhaskarजमीन विवाद में पानी हुआ खून

महेन्द्र पाल गुप्त

अमृतसर. पारिवारिक जमीन के विवाद ने सगे भाइयों में ऐसी दूरियां पैदा कर दीं कि उनके खूनी रिश्ते भी पानी हो चुके हैं। एक भाई ने अपने दो सगे भाइयों को 28 अप्रैल, 2008 को तत्कालीन इलाका मैजिस्ट्रेट हर्ष मेहता की अदालत से तीन तीन साल की कैद और दो दो हजार रुपए जुर्माने की सजा करवा दी थी।



इसके खिलाफ दायर अपील की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज केके करीर की अदालत ने लोअर कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए सुनाई गई सजा को प्रोबेशन में तबदील कर दिया। अपने फैसले में अदालत ने आरोपी भाइयों को दो दो हजार रुपए जुर्माना करते हुए दोनों को एक साल के लिए दस दस हजार रुपए की नेक चाल चलनी की जमानतों पर छोड़ दिया है।



गौरतलब है कि थाना सदर में 13 अक्तूबर, 2001 को दर्ज किए गए मामले के अनुसार दया नंद नगर, नंगली भट्ठा निवासी जोगिन्द्र सिंह और उसके दो अन्य भाइयों ने अपने परिवार की सांझी जमीन में से अपना हिस्सा बेच दिया। इस पर जोगिन्द्र सिंह के सगे भाई नरिन्द्र सिंह व लखविन्द्र सिंह एतराज कर रहे थे।



जोगिन्द्र सिंह का आरोप था कि इस विवाद के चलते 27 सितंबर सुबह 11.30 बजे उसके इन दोनों भाइयों ने तेजधार हथियारों से हमला करके उसे घायल कर दिया था। बचाव में जब उसका भाई बलबीर सिंह व भाभी कश्मीर कौर आगे आए तो उन्होंने उन पर भी हमला बोल दिया, जिसमें उसकी भाभी भी घायल हो गई।

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