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Thursday, Nov 19th, 2009, 2:35 am [IST]  

danik bhaskarसिर्फ डाक्टर फ्री, और कुछ नहीं

अमित ऋषि

अमृतसर. सिविल अस्पताल में दांतों के इलाज के लिए क्वालीफाईड डाक्टर तो मिल जाएंगे। मगर दवाइयां या कैविटी फिलिंग का सामान आपको साथ ही लाना पड़ेगा। सवाल यह है कि अगर सब कुछ मरीजों ने ही करना है तो अस्पताल ने क्या करना है? अस्पताल की ओर से भी मैटीरियल खरीदा जाता है मगर वह कितने दिन चलता है यह सब को पता है।



सिविल अस्पताल में दो डैंटल डाक्टर हैं और पोस्टें भी इतनी ही। हर रोज 30 से 40 मरीज इलाज के लिए आते हैं। मगर डैंटल चेयर मात्र एक है, जबकि दूसरी काफी समय से खराब पड़ी है। इसके कारण मरीजों के पास अपनी बारी के इंतजार के सिवाए कोई चारा नहीं।



इतना नहीं डैंचर बनाने वाला टैक्नीशियन सिविल अस्पताल में तो क्या प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं है। मरीजों को डैंचर भी प्राइवेट बनवाने पड़ते हैं। यह हाल तो मरीजों का है। अस्पताल के कुछ मुलाजिम कहते हैं कि उन्होंने भी पैसे खर्च कर अपने दांत ठीक करवाए हैं।



क्या चाहिए और क्या नहीं



सूत्रों के मुताबिक डैंटल के पूरे क्लीनिक के लिए अस्पताल में कम से कम तीन डैंटल चेयर होनी चाहिएं, जो सबसे बड़ी समस्या है। दो चेयर है जिनमें से एक को खराब हुआ अर्सा बीत गया। इसके अलावा डैंचर बनाने के लिए टैक्नीशियन चाहिए। रूट कैनाल ट्रीटमैंट (आरसीटी) के लिए जो मैटीरियल भी कम ही मिलता है। दांतों के ऊपर कैप के लिए भी मरीज को खुद मशक्कत करनी पड़ती है।



इस बारे में जिला डैंटल हैल्थ अधिकारी डा. अशोक शर्मा कहते हैं कि अस्पताल में कैप का प्रोवीजन ही नहीं है। उन्हें जो सामान मिल रहा है, उसी में जरूरत से ज्यादा अच्छा कर रहे हैं। इसके लिए तो एक आधुनिक लैब चाहिए। एक माह पहले उन्होंने खत्म हुए सामान की लिस्ट सरकार को भेजी थी, जो अभी तक नहीं मिला।



औजारों को स्टरलाइज करने के लिए आटो क्लेव नहीं है। यह सारा काम आपरेशन थियेटर से करवाया जा रहा है। यहां तक कि मैट्रिक्स बैंड जिसकी कीमत भले ही 10 रुपए है मगर इसके बिना दांतों का कोई काम नहीं हो सकता।



मेरे हाथ में कुछ नहीं



इस संबंध में सिविल सर्जन डा. लहंबर सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डैंटल क्लीनिक में एक ही चेयर की प्रोवीजन है। अब यह सरकार के हाथ में है कि क्या किया जा सकता है। रही बात मैटीरियल की तो समय समय पर मुहैया कराया जाता है। दवाइयां और अन्य महंगे मैटीरियल जरूर मरीज को खुद परचेस करना पड़ता है। सरकार द्वारा फ्री सुविधाएं मुहैया करवाने के दावों बारे उन्होंने कहा ‘हम क्या कह सकते हैं’।

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