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Thursday, Nov 19th, 2009, 2:38 am [IST]  

danik bhaskarवैगन चाहिए तो पैसे लाइए

संजय गर्ग

अमृतसर. रेल मंत्री की ममता भारतीय निर्यातकों पर कब जागेगी, इसको लेकर अमृतसर का रेलवे कारगो बेसब्री से इंतजार कर रहा है। एक ओर भारत और पाक के बीच कारोबार बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के आला रेल अधिकारी अमृतसर में कई बार डेरा लगा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर निर्यातकों द्वारा बार बार मांगे जाने के बावजूद उनको पाक माल भेजने के लिए पीआर वैगन अलॉट नहीं हो रहे है।



हां! थोड़ी मुट्ठी गर्म होने की देर है कि रेलवे आपरेटिंग विभाग वैगन देने में देर नहीं लगाता। आलम यह है कि रेलवे कारगो के अलग—अलग शैडों में पाकिस्तान जाने के लिए करोड़ों रुपए का सोयाबीन अपनी बारी का आने की बाट जोह रहा है। मौजूदा समय में भारत और पाकिस्तान के बीच आने जाने वाले माल की ढुलाई पीआर (पाकिस्तान रेलवे) के जरिए ही हो रही है।



पाकिस्तान से आने वाले इन वैगनों में ही अमृतसर से माल लोड करके लाहौर भेजा जाता है। हालांकि वैगन पाक रेलवे के हैं, लेकिन अमृतसर से अटारी तक के माल का किराया भारतीय रेलवे के खजाने में जाता है। सूत्रों के अनुसार इस समय एक वैगन का करीब 4880 रुपए बतौर किराया आ रहा है, लेकिन फिरोजपुर डिवीजन के बड़े अधिकारी निर्यातकों से रिश्वत लिए बिना वैगन अलॉट नहीं कर रहे हैं।



बेशक उन्हें खाली वैगनों को ही सरहद पार क्यों न करवाना पड़े? नाम न छापने पर निर्यातकों ने बताया कि एक ओर तो अधिकारी दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ाने की दुहाई देते हैं, जबकि खाली वैगन होने के बावजूद उनका माल कई कई दिनों तक शैडों में धूल फांकता रहता है। मिन्नतों के बाद वैगन देते भी है, तो उनकों नॉन कस्टम एरिया (कोयला यार्ड) में प्लेस कर देते है, जबकि एमटीआर शैड के ट्रैक पर खाली वैगनों में लोडिंग की इजाजत नहीं देते।



मध्यप्रदेश से आ रहा करोड़ों का सोयाबीन रेलवे शैडों में इसलिए सड़ रहा है, क्योंकि कोयला यार्ड में लोड होने वाले माल को कस्टम विभाग क्लीयर नहीं करता। हैरानी की बात तो यह है कि रेलवे इंटरचेंज के तहत खाली वैगनों को अमृतसर से लाहौर भेज रहा है। एक निर्यातक के क्लीयरिंग एजैंट ने बताया कि वह 24 वैगनों के लिए गुहार लगाता रहा, उसमें 11,700 के करीब सोयाबीन की बोरियां भेजनी थी।



सवा करोड़ का माल खराब होता देख मजबूरन उसे आपरेटिंग विभाग के अधिकारियों की जेब गर्म करनी पड़ी। उसके अनुसार नीचे से लेकर ऊपर तक एक वैगन के अलॉटमैंट के लिए 500 से 700 रुपए तक देने पड़े। दूसरी ओर विभाग के अधिकारियों ने नाम न छापने पर ऐसी कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया है।

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