करोड़ों के फेर में फंसा पटवारी
अम्बाला सिटी. सिटी के बसंत विहार में रहने वाला पटवारी देवेंद्र कुमार करोड़ों के फेर में फंस चुका है। विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद पटवारी के खिलाफ पंजोखरा पुलिस स्टेशन में आय से अधिक संपत्ति बाबत मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन अभी तक पटवारी पुलिस गिरफ्त से दूर है।
इधर, खुद को फंसता देख पटवारी ने भी जुगाड़ लड़ाना शुरू कर दिया है। दरअसल, पटवारी देवेंद्र कुमार पर आरोप है कि उसने काफी समय पहले अपने सालों के नाम पंजोखरा में 16 एकड़ जमीन खरीदी थी। जिसे बाद में उसने अपनी पत्नी उर्मिला को गिफ्टिड दिखा दिया और सालों से अपनी पत्नी के नाम करा लिया।
इसके अलावा पटवारी के पास बसंत विहार में दो प्लाट हैं। साथ ही एक कोठी है। जिसकी कीमत लाखों में है। पटवारी पर यह भी आरोप है कि वह पेंशन लगवाने के नाम पर लोगों से पैसा इकट्ठा करता है। कुल मिलाकर पटवारी के पास करोड़ों की संपत्ति है। पटवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई विजिलेंस से रिटायर्ड हो चुके डीएसपी रामशरण की जांच रिपोर्ट पर अमल में लाई गई है।
विजिलेंस डीएसपी की जांच ने कसा शिकंजा
वर्ष 2007 में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को पटवारी देवेंद्र कुमार के खिलाफ गुमनाम शिकायत मिली थी। जिसमें पटवारी के पास आय से अधिक संपत्ति होने की बात कही गई थी। यही नहीं शिकायत में पटवारी के नाम संपत्ति का पूरा ब्यौरा भी दिया गया था। जिसके बाद विजिलेंस ने पटवारी के पास मौजूद संपत्ति की जांच का जिम्मा डीएसपी रामशरण को सौंपा था। जिन्होंने अपनी जांच में पटवारी के पास आय से अधिक संपत्ति होना पाया। फिर पटवारी के खिलाफ जांच रिपोर्ट को उच्चधिकारियों के पास भेज दिया था।
क्या कहते हैं विजिलेंस एसपी
विजिलेंस एसपी हेमंत कलसन का कहना है कि उन्हें नहीं पता पटवारी के खिलाफ मुकदमा विजिलेंस ने दर्ज कराया है। हालांकि ऐसा होना नहीं चाहिए फिर भी वह पूछकर बताएंगे।
क्या कहती हैं जिला एसपी
एसपी भारती अरोड़ा का कहना है कि विजिलेंस की जांच के बाद यह मामला जिला पुलिस के पास क्यों दर्ज हुआ। इस बारे उन्हें जानकारी नहीं है। फिर भी पूछकर ही कुछ बता पाएंगी।
क्या कहते हैं मौजूदा जांच अधिकारी
पटवारी के खिलाफ पंजोखरा थाने में दर्ज मामले की आगामी जांच का जिम्मा कैंट डीएसपी राजेश शर्मा को सौंपा गया है। उनका कहना है कि यह मामला डीजी विजिलेंस के निर्देशों पर जिला पुलिस के थाने में दर्ज हुआ है। अभी मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद गिरफ्तारी डाली जाएगी।
विजिलेंस को सौंपा जाना चाहिए था मामला
मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी के खिलाफ प्राथमिक जांच का जिम्मा विजिलेंस को सौंपा गया था। जिसे डीएसपी रामशरण की जांच के बाद उच्चधिकारियों के पास भेज दिया गया था। असूलन मामले को दर्ज करने के बाद आगामी जांच का जिम्मा भी विजिलेंस को सौंपा जाना चाहिए था। क्योंकि विजिलेंस भ्रष्टाचार, जालसाजी सहित कई मामले अपने थानों में दर्ज करती है। बावजूद इसके उच्चधिकारियों ने पटवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का जिम्मा जिला पुलिस को क्यों सौंपा?










