अस्पताल में बीमारी को न्यौता
करनाल. इस समय प्रदेश को स्वाइन फ्लू ने अपनी गिरफ्त में लिया हुआ है। लगातार इसके रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इससे निपटने के लिए विभाग की ओर से भी कई तरह के कदम उठाए गए हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के अलावा आईसोलेशन रूम भी विकसित किए गए है, लेकिन थोड़ी लापरवाही के आगे ये प्रबंध बौने साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में लोगों व कुछ डाक्टरों की लापरवाही इस बीमारी को न्यौता दे रही है।
सिविल अस्पताल में आने वाले लोग अस्पताल में बिना मास्क लगाए घूमते रहते हैं। यही नहीं कई डाक्टर भी बिना मास्क लगाए मरीजों का चेकअप करते हैं। जोकि स्वाइन फ्लू को बढ़ावा देने के लिए काफी है, क्योंकि स्वाइन फ्लू का वायरस फैल चुका है और इस तरह की लापरवाही इसे बढ़ने में सहायता करती है। यदि इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो स्वाइन फ्लू और अधिक बढ़ सकता है।
जागरूकता ही बचाव
संक्रमित सुअर को दूर रखें। दिन में हाथों को साबुन से बार-बार धोते रहें। संक्रमित व्यक्ति व सुअर के पास जाने से पहले मुंह व नाक पर रूमाल रख लें। साफ पानी पीएं। प्रयोग किए गए मास्क को जमीन में दबा दें। अस्पताल में जाने से पहले मास्क का प्रयोग करें। साफ एवं स्वच्छ खाने का सेवन करें।बच्चों के पास जाते समय मास्क का प्रयोग करें।
डस्टबिन में पड़े हैं प्रयोग किए हुए मास्क
लापरवाही का आलम सिविल अस्पताल व ट्रामा सेंटर के डस्टबिन में देखने को मिलता है। इन डस्टबिन में डाक्टर व मरीजों द्वारा प्रयोग किए गए मास्क पड़े हुए हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इन डस्टबिन में आने वाले कूड़ा-कर्कट को प्रतिदिन उठवा दिया जाता है, लेकिन इस तरह की लापरवाही बीमारी को बढ़ाने का काम करती है। जबकि इस बारे में अस्पताल को लोगों को जागरूक करना चाहिए।
लोगों को अस्पताल में मास्क लगाकर आना चाहिए। डाक्टरों को भी मास्क लगाने की हिदायत है। डस्टबिन में फेंके जाने वाले मास्क को भी तुरंत डिस्पोज करने की व्यवस्था की जाएगी। - डा. चरणजीत चौधरी, जिला नोडल अधिकारी स्वाइन फ्लू, करनाल










