नहीं डरेंगे, हर मुसीबत से लड़ेंगे
लुधियाना. शहर में जिस तरह से आबादी बढ़ रही है, उसी तरह से क्राइम का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में नौनिहालों की सुरक्षा भी हमारे सामने एक बड़ा प्रश्न है। स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को सेल्फ डिफेंस के लिए तैयार करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। राहत की बात यह है कि शहर के स्कूलों में इन बच्चों को सेल्फ डिफेंस के गुर सिखाए जा रहे हैं।
इससे जहां छात्र अपनी सुरक्षा के लिए तैयार हो रहे हैं, वहीं उनमें एक ऐसी क्षमता पैदा हो रही है, कि वह अपने साथ-साथ दूसरों की मदद कर सकें। खास बात यह है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने भी कंपरीहैंसिव एंड कंटीन्यूअस ई-वैल्यूएशन स्कीम के जरिए स्टूडेंट्स को एक्टिविटीज के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
इस प्रोग्राम के जरिए स्कूलों में स्टूडेंट्स को एक्टिविटीज का हिस्सा बनाने और उन्हें प्रेक्टिकल असाइनमेंट्स के आधार पर अंक देने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें स्टूडेंट्स की असाइनमेंट्स, विषय की जानकारी व एक्टिविटीज के आधार पर इंटरनल असेसमेंट लगाई जाएगी। बच्चों में सेल्फ डिफेंस की कमी व बोर्ड के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए शहर के स्कूलों ने बच्चों को सेल्फ डिफेंस के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है, तो कुछ इसे जल्द शुरू करने जा रहे हैं।
चंडीगढ़ रोड स्थित बीसीएम स्कूल के प्रिंसिपल डीपी गुलेरिया ने बताया कि स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन के साथ-साथ वैल्यू एजुकेशन होनी बहुत जरूरी है। दुर्घटनाएं व क्राइम बढ़ रहा है, जिसके चलते स्टूडेंट्स को आग लगने की स्थिति से निपटने, भूकंप, बाढ़ व टेरेरिस्ट अटैक से बचने के बारे में पता होना चाहिए।
स्कूल में सेमिनार व वर्कशॉप लगाकर उपरोक्त स्थितियों से निपटने के बारे में बताया जाता है, इसके साथ ही बच्चों को मेडिटेशन के जरिए अंदर से स्ट्रांग बनाया जाता है। साथ ही फिजीकल फिटनेस के लिए योग और ताइक्वांडो की ट्रेनिंग भी दी जाती है। खासकर लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाती है।
सीबीएसई निर्देशों के तहत शुरू की ट्रेनिंग
डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल आरएस पटियाल कहते हैं कि बच्चों को सीबीएसई की गाइड लाइन के मुताबिक एसएसटी के सिलेबस में ही कुदरती आपदा से निपटने के बारे में बताया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को विभिन्न आपदाओं का हवाला देते हुए उन्हें कम समय में राहत के लिए किए जाने वाले प्रयासों के बारे में भी बताया जाता है। ताकि जरूरत पड़ने पर वह खुद के साथ-साथ दूसरों की भी सहायता कर सकें।
हर स्थिति से निपटने को तैयार कर रहे बच्चें को
बीसीएम आर्या मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल परमजीत कौर कहती हैं कि स्कूल में बच्चों को विभिन्न एक्टीविटीज के जरिए सेल्फ डिफेंस के लिए भी तैयार किया जाता है। इसमें बच्चों को कराटे सिखाने के साथ-साथ आग लग जाने, भूकंप आने या किसी अन्य आपदा के दौरान खुद की सहायता के लिए बताया जाता है।
रामलाल भसीन पब्लिक स्कूल डुगरी की प्रिंसिपल तरन्नुम फातिमा के मुताबिक उनके स्कूल में बच्चों को वुशु की बकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। इस गेम को उनके यहां के बच्चे नेशनल स्तर पर भी खेल चुके हैं। इसके अलावा बच्चों को मॉक ड्रिल के जरिए सिखाने का प्रयास किया जाता है। इसमें इमरजेंसी एक्जिट करने और किसी आपदा के समय में स्कूल कैसे खाली करना है या घर में भी कोई दिक्कत आए, तो क्या करें।
इसके लिए समय-समय पर सेमिनार के जरिए बच्चों को पूर्ण जानकारी दी जाती है। इनवायरमेंटल स्टडी में इस प्रकार के चैप्टर होते हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट के बारे में भी बताते हैं और बच्चों को अन्य लोगों को जागरूक करने को कहते हैं। रायन इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल गुरप्रीत कौर ने बताया कि स्कूल में बच्चों को समय-समय पर विभिन्न कैंप के जरिए सैल्फ डिफेंस के बारे में बताया जाता है। कुदरती आपदा से बचाव के बारे में भी सेमिनार के जरिए उन्हें बताया जाता है।










