निकाय चुनाव: संघ नहीं करेगा किसी की सिफारिश
भोपाल. आरएसएस (संघ) ने नगरीय निकाय चुनाव से खुद को पूरी तरह अलग कर रखा है। महापौर पद के प्रत्याशियों के लिए संघ अपनी तरफ से कोई नाम पार्टी को नहीं सुझाएगा। पार्टी में ही इतने दावेदार हैं कि वह इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहता। विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों के इक्का- दुक्का कार्यकर्ताओं को पार्षद का टिकट जरूर मिल सकता है।
आम तौर पर भाजपा के सभी मामलों में अंतिम निर्णय आरएसएस ही लेता है। हर चुनाव में संघ की मर्जी से ही टिकट बांटे जाते रहे हैं। कई बार संघ या उसके अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों को सीधे टिकट भी मिलता रहा है।
1999 के महापौर के चुनाव में भोपाल में दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी राजो मालवीय को संघ की अनुशंसा पर ही टिकट दिया गया था। तब संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रचार में भी सीधे हिस्सा लिया था ।
संघ का मानना है कि राजो मालवीय को पार्टी के स्थानीय नेताओं ने सहयोग नहीं किया, इसीलिए वे चुनाव हार गईं। पिछले तीन चुनावों में आरएसएस या उसके अनुषांगिक संगठनों के जिन पदाधिकारियों ने पार्षद का चुनाव लड़ा, उनमें से ज्यादातर हार गए।
आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि इस बार भी कई लोग उनके पास दावेदारी के लिए आ रहे हैं, लेकिन वे किसी की भी अनुशंसा नहीं कर रहे हैं। स्थानीय स्तर के इस चुनाव में पार्षद और महापौर पद के लिए पार्टी में ही इतने दावेदार हैं कि संघ अपनी तरफ से इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहता।
विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों के जो कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, उनके लिए इन संगठनों के पदाधिकारियों ने जरूर भाजपा नेताओं से अनुरोध किया है, लेकिन इनकी संख्या एक दर्जन से भी कम है।
सूत्रों के अनुसार संघ ने अभी तक अपने स्वयंसेवकों को इन चुनावों के लिए कोई निर्देश भी नहीं दिए हैं। यह जरूर संभव है कि टिकट वितरण के बाद वार्ड स्तर पर वे व्यक्तिगत रूप से भाजपा प्रत्याशी की मदद कर सकते हैं।










