Danik Bhaskar Logo
| 27 Editions | 9 States

Investor
Thursday, Nov 19th, 2009, 4:31 am [IST]  

danik bhaskarनानकशाही कैलेंडर पर बहस गैरजरूरी

बलविंदर कुमार

जालंधर. सिख संगत के लिए नानकशाही कैलेंडर तैयार करने वाले पाल सिंह पुरेवाल इस कैलेंडर पर छिड़ी बहस को राजनीति और जानकारी का अभाव मानते हैं। नानकशाही कैलेंडर पर भास्कर से की बातचीत में पुरेवाल ने बताया कि 1999 में लागू होने के बाद बहस छिड़ी थी और इस पर ‘विराम’ लगा दिया गया।



फिर लागू होने पर भी विरोध



साल 2003 में बैसाखी पर एसजीपीसी ने दोबारा इसे लागू किया और तब से लागू है। हालांकि इसके बावजूद सिखों का एक वर्ग इसे मानने को तैयार नहीं है। पुरेवाल मुताबिक पिछले दस सालों से ही कैलेंडर पर उठे सवालों के जबाव देते आ रहे हैं।



विरोधियों का वर्ग छोटा



उन्होंने दावा किया कि कैलेंडर का विरोध करने वाला वर्ग बहुत छोटा है, ज्यादातर सिख कैलेंडर के हिमायती हैं। उन्होंने बताया कि नानकशाही कैंलेंडर गुरबाणी पर पूरा उतरता है और मौसमों के भी अनुकूल है। कैलेंडर के लिए उन्होंने साल की लंबाई 365 दिन, पांच घंटे, 48 मिनट और 46 सैकेंड ली है। यह लंबाई अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य है।



बाबे नानक का कैलेंडर



सूर्या सिद्धांत, ग्रहलाघवम, मकरंद सारणी समेत कई किताबों का गहरा अध्ययन करने के बाद पुरेवाल ने पांच सौ साल (1469-2000) की जंतरी भी तैयार की है। बाबे नानक का नाम और प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाने के लिए उन्होंने अपने इस कैलेंडर का नाम नानकशाही कैलेंडर रखा है। उनके मुताबिक सूर्य सिद्धांत व इस तरह की ही दूसरी विधियों की पूरी जानकारी नहीं होना विरोध का एक कारण है।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
select your language:     Hindi Roman     Hindi Phonetic     English
comment:
code: