दिल्ली-भोपाल में जमने लगा डेरा
इंदौर. महापौर का टिकट हासिल करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में डेरा डालना शुरू कर दिया है। बुधवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने दिल्ली में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य नेताओं से मुलाकात कर दावा पेश किया। इधर, विधायक सत्यनारायण पटेल ने गुरुवार को दिल्ली जाने का मन बनाया है।
वहीं, अश्विन जोशी भी दिल्ली के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के दोनों विधायक शहर कांग्रेस अध्यक्ष के बजाय किसी दूसरे को टिकट दिलाने की जुगाड़ में हैं। पार्टी इन दोनों से किसी एक को टिकट देती है तो यह भी उन्हें मंजूर होगा। उधर, भाजपा में भी तगड़े दांव-पेंच खेले जा रहे हैं। सत्यनारायण सत्तन की इस बार चुनाव लड़ने की खूब इच्छा है और वे इससे पार्टी के नेताओं को अवगत भी करा चुके हैं। उनके टिकट के लिए संगठन का एक धड़ा भी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
लेकिन इस बीच सामान्य वर्ग के दूसरे दावेदारों में भंवरसिंह शेखावत, चंदू माखीजा, गोपीकृष्ण नेमा, ललित पोरवाल सहित पिछड़ा वर्ग के शंकर लालवानी, मधु वर्मा भी पीछे नहीं है। गुरुवार को भोपाल में होने वाली कोर ग्रुप की बैठक में भाजपा के ज्यादातर दावेदार वहां नजर आने की संभावना है। इसमें से कुछ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र तोमर, विक्रम वर्मा के सीधे संपर्क में हैं। दो बार चुनाव हार चुके एक नेता तो विक्रम वर्मा के बूते अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं।
पिछड़ा वर्ग की दावेदारी कमजोर हुई
भाजपा के प्रदेश नेताओं के गणित के चलते इंदौर में पिछड़ा वर्ग के नेताओं की दावेदारी कमजोर पड़ती नजर आ रही है। जबलपुर व रीवा में महापौर का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो चुका है। देवास-ग्वालियर में पिछड़ा वर्ग महिला की उम्मीदवार होंगी। चार सीट इंदौर, रतलाम, सतना, सिंगरौली अनारक्षित हैं। बाकी की चार महिला व एक अजा महिला है। उज्जैन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। ऐसे में इंदौर से पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को टिकट देना फिलहाल पार्टी के गले नहीं उतर रहा है। बड़े नेताओं का तर्क है इंदौर में सामान्य पुरुष को टिकट नहीं दिया तो प्रदेश के नगरीय निकायों में पार्टी सभी वर्गो का सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाएगी।










