बुरहानपुर दंगे में मारे गए लोगों के परिजन को एक नहीं दो लाख रु.दें
जबलपुर. हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को कहा है कि वह बुरहानपुर के दंगे में मारे गए लोगों के परिजन को मुआवजे के तौर पर एक लाख नहीं, बल्कि दो लाख रुपए दे।
जस्टिस आरएस गर्ग और जस्टिस केएस चौहान की युगलपीठ ने इस राशि का भुगतान दो माह के भीतर करने के निर्देश देकर मामले का निराकरण कर दिया है। यह मामला बुरहानपुर की पृथ्वी एजुकेशनल सोसायटी के अध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में कहा गया था कि अक्टूबर 2008 में बुरहानपुर में दो गुटों के बीच दंगे हुए थे, जिनमें दोनों पक्ष के नौ लोग मारे गए थे और 50 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हुए थे। याचिका के अनुसार राज्य सरकार ने दंगे में मारे गए लोगों के परिजन को एक लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने के आदेश दिए थे।
मारे गए लोगों को परिवार की रोजी-रोटी कमाने वाले बताते हुए याचिका में राहत चाही गई थी कि मुआवजे की राशि को एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपए किए जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाएं।
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2006 में जफर अहमद खान के मामले में दिए गए फैसले का हवाला देकर कहा गया कि राज्य सरकार को कम से कम दो लाख रुपए का मुआवजा देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाएं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट राज्य सरकार द्वारा किए गए भुगतान में न्यूनतम या अधिकतम राशि का पैमाना तय नहीं कर सकती।
सुनवाई के बाद युगलपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2006 के फैसले में कोई दिशा निर्देश नहीं दिया, बल्कि अदालत की यह राय थी कि सरकार पीड़ित परिवारों को इतनी राहत तो दे, जिससे वो दंगे के कारण हुए सदमे से उबर सकें।
इस मत के साथ युगलपीठ ने राज्य सरकार को दो लाख रुपए मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए। आवेदक की ओर से अधिवक्ता मनिन्दर एस. भट्टी और अधिवक्ता योगेश मोहन तिवारी द्वारा पैरवी की गई।










