नामुमकिन को बनाया मुमकिन
जबलपुर. दिमाग में पानी भरने की समस्या से ग्रसित एक वर्षीय बच्च्ची जिसकी भोपाल के एक निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में छह बार सर्जरी की गई, जो कि असफल रही और इन्दौर तथा भोपाल के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में जो सर्जरी नहीं हो सकी।
उक्त बालिका की सफल जटिल दूरबीन सर्जरी जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की न्यूरो सर्जरी यूनिट में की गई। सर्जरी के बाद बालिका की हालत ठीक है। जानकारी के अनुसार भोपाल निवासी एक वर्षीय बालिका अरीमा को जन्म से ही दिमाग में पानी भरने की समस्या थी।
जिसका पहले भोपाल के शासकीय मेडिकल कॉलेज में, फिर एक निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुआ। जहां पर मासूम की छह बार सर्जरी की गई और बाद में पानी निकलने के लिए नली डाल दी गई। समस्या यह हो रही थी कि जो नली डाली गई थी, वह बार-बार इंफेक्शन के कारण ब्लॉक हो जा रही थी।
जिससे बालिका की हालत अत्यंत ही गंभीर हो गई थी तथा बाद में उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। जहां पर न्यूरो सर्जन डॉ. वायआर यादव द्वारा उक्त बच्ची की जांच की और फिर उसकी दूरबीन से जटिल सर्जरी की। डॉ. यादव के अनुसार सर्जरी करके बालिका के दिमाग से नली हटा दी गई और जो ब्लॉकेज था, उसे भी दूर कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने दिये थे निर्देश
मेडिकल कॉलेज की न्यूरो सर्जरी यूनिट को अरीमा के ऑपरेशन के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये थे।
नि:शुल्क हुआ ऑपरेशन
दूरबीन पद्धति से सर्जरी अत्यंत ही जटिल और खर्चीली होती है। दूरबीन से न्यूरो सर्जरी में सामान्यत: एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है, पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पीड़ित बालिका की सर्जरी नि:शुल्क हो गई।
उक्त बालिका का इलाज दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के तहत किया गया। न्यूरो सर्जन डॉ. यादव के अनुसार यदि इस समस्या से ग्रस्त और भी बच्चे हैं और उनके पास दीनदयाल कार्ड भी नहीं हैं तो ऐसे
जरूरतमंदों का की दूरबीन सर्जरी यहां आयोजित 28 और 29 नवम्बर को आयोजित कार्यशाला मंे भी उनकी नि:शुल्क सर्जरी की जायेगी।
विभाग के लिए प्रयास क्यों नहीं
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की न्यूरो सर्जरी यूनिट में इलाज के लिए प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहीं यह प्रदेश का ऐसा पहला मेडिकल कॉलेज अस्पताल है, जहां पर दूरबीन द्वारा न्यूरो सर्जरी की जाती है।
यदि यहां पर पृथक न्यूरो सर्जरी विभाग बन जाता है तो इससे मेडिकल में अतिरिक्त सीटें बढ़ जायेंगी, वहीं न्यूरो सर्जन की संख्या भी बढ़ जायेगी।
जिससे छात्रों को भी सीखने का मौका मिल सकता है, पर राजनीतिक उदासीनता के चलते यहां पृथक न्यूरो सर्जरी विभाग प्रारंभ नहीं हो सका है।










