सात दिन में स्वाइन फ्लू का दूसरा मरीज
इंदौर. शहर में स्वाइन फ्लू की दस्तक हो चुकी है। बुधवार को बांबे अस्पताल प्रबंधन ने स्वाइन फ्लू मरीज के भर्ती होने की सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दी है। सात दिन मंे इस बीमारी का दूसरा मरीज सामने आया है। इसके पहले एमवाय अस्पताल में एक युवती इलाज के लिए आई थी जिसे स्वाइन फ्लू था।
तीन दिन पहले बांबे अस्पताल में 20 वर्षीय युवती भर्ती हुई थी जो पुणो की यात्रा कर इंदौर लौटी थी। सर्दी-खांसी होने पर उपचार करवाया लेकिन बाद में सांस में परेशानी होने से मरीज को वेंटीलेटर पर रखा गया। प्राइवेट लेबोरेटरी में स्वाइन फ्लू की जांच करवाई गई। रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है।
अस्पताल प्रबंधन से बुधवार देर शाम सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग सजग हो गया। ताबड़तोड़ डॉक्टरों की टीम अस्पताल पहुंची और मरीज को टेमीफ्लू की गोलियां दी। मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों की मॉनीटरिंग भी शुरू कर दी गई है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय दीक्षित ने बताया एहतियात के तौर पर इलाज करने वाले डॉक्टरों का क्रिमोफाइलेक्सिस (बचाव के उपाय) ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। युवती का सैंपल गुरुवार को जांच के लिए जबलपुर की लेबोरेटरी भेजा जाएगा।
अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल पराशर ने मरीज के भर्ती होने की पुष्टि की है। उधर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राइवेट संस्था से अधिकृत होने संबंधी जानकारी भी ली जा रही है जहां सैंपल कलेक्शन किया जा रहा है।
इंदौर में हो रही जांच की जानकारी नहीं
स्वाइन फ्लू की जांच के लिए शहर की एक प्राइवेट लेबोरेटरी में सैंपल कलेक्शन किए जा रहे हैं लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी भी नहीं है। हालांकि इसे अधिकृत भी नहीं माना रहा है लेकिन इस रिपोर्ट को नकारा भी नहीं जा रहा है। जांच रिपोर्ट पर भरोसा कर दोनों मरीजों को टेमीफ्लू दी गई है।
सपंर्क में आने वाले लोगों की भी मॉनीटरिंग शुरू की गई है। सूत्रों के अनुसार विभाग को यह डर भी सताने लगा है कि कहीं डेंगू की तरह प्राइवेट लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट नहीं मानने की गलती से बीमारी न फैल जाए। अब तक स्वाइन फ्लू के लिए एमवाय अस्पताल ही अधिकृत था। इस बार प्राइवेट अस्पतालों में भी इस बीमारी का इलाज किया जा रहा है।










