अपराध का कारण शार्टकट
उज्जैन. पाश्चात्य संस्कृति व आधुनिकता की अंधी दौड़ ने युवाआंे को अपराध की दुनिया में धकेला है। युवा टीवी-चैनलों पर प्रसारित कार्यक्रम व फिल्मों से अच्छाई की बजाय बुराई को ग्रहण कर रहे हैं।
व्यस्तता के कारण अभिभावकों का बच्चंे पर नियत्रंण नहीं है। महंगे मोबाइल, कपड़े व बाइक का शौक पूरा करने के लिए युवा किसी भी हद को पार करने को तैयार हैं। सादा जीवन-उच्च विचार जैसे आदर्शो को ताक पर रख युवा अपने-पराए का भेद भी भुला चुके हैं।
महंगे शौक की पूर्ति का सामथ्र्य नहीं होने के बावजूद युवा अपराधों के शार्टकट रास्ते से इनकी पूर्ति करना चाहते हैं। सामाजिक मूल्यों मंे गिरावट व आधुनिकता की पूर्ति के शार्टकट का अंत अपराध की दुनिया मंे होता है।
मंगलवार को सेठीनगर मंे शिक्षक विजय कुमार मिश्रा के यहां हुई चोरी की वारदात में उनके पुत्र व भतीजे के शामिल होने के बाद युवाआंे मंे अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध मंे आम आदमी से भास्कर ने राय जानी।
अपराध में रुझान के कई कारण हैं
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार पुरोहित का कहना है अपराध में युवा वर्ग के रुझान के कई कारण हैं। यह हमारी संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति पर चोट है। पूर्व मंे समाज मंे संयुक्त परिवारांे का चलन था लेकिन आज एकल परिवारों की अधिकता है।
पारिवारिक संस्कारांे के हनन का यह अहम कारण है। इसके अलावा चिकित्सकीय अभिमत है कि बच्चंे व युवाआंे मंे इस तरह की प्रवृत्ति असामान्य प्रसूति, लालन-पालन मंे कमी, माता-पिता का क्रोधी प्रवृत्ति का होना से आती है। उन्माद की प्रवृत्ति में बच्चे व युवा कुछ भी कर गुजरते हंै।










