बड़े अफसरों पर उठी अंगुली
उज्जैन. जमीन के जरिए तिजोरियां भरने में बड़े अफसर भी पीछे नहीं रहे हैं। अब एक ऐसी चौंकाने वाली शिकायत भी अफसरों के पास पहुंची है जिसमें कहा गया है कि एक कॉलोनी के प्रकरण को शासन ने निगरानी में लिया था लेकिन पूर्व प्रमुख सचिव ने संस्था को अवैधानिक छूट दे दी।
मामला आदर्श विक्रम गृह निर्माण समिति मर्यादित का है जिसने देवासरोड स्थित करोड़ों रुपए की २६ बीघा भूमि पर कॉलोनी बसा दी। शिकायतकर्ता ऊंकारलाल बडेरा ने कहा है कॉलोनी अवैध रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विकसित की गई। इससे शासन को करोड़ों रुपए की आर्थिक हानि पहुंची।
इसका प्रकरण (एफ १/१९/७/९/८७) वल्लभ भवन सचिवालय पहुंचा था। तत्कालीन कलेक्टर जीपी सिंघल ने जांच रिपोर्ट शासन को दी थी। जिसके आधार पर समिति के विरुद्ध कार्रवाई कर आगामी सभी कार्य रोक दिए थे।
बाद में उज्जैन के पूर्व संभागायुक्त एवं तत्कालीन प्रमुख सचिव नन्हेसिंह ने शासन द्वारा निगरानी में लिए गए प्रकरण में १ दिसंबर ९७ को आदेश जारी कर संस्था को अवैधानिक रूप से छूट दे दी। बकौल बडेरा, भारी लेन-देन के बाद यह छूट दी गई थी।
इतना ही नहीं कई बड़े अधिकारियों और रसूखदार लोगों को कॉलोनी में ही प्लॉट देकर ‘खुश’ भी किया गया था। जबकि सोसायटी निम्न आयवर्ग के लोगों के नाम से विकसित की गई थी। शिकायतकर्ता ने पूर्व कलेक्टर रमेशचंद्र सक्सेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
नियमों को ताक पर रखा: नगर भूमि सीमा अधिनियम की धारा २क् का उल्लंघन कर प्लॉटों की रेवड़ियां बांटी गई थीं। शिकायतकर्ता का कहना है झूठे शपथ पत्र देकर अवैध तौर से भवन व भूखंड होते हुए भी सोसायटी ने भूखंड अधिक कीमत में ऐसे सदस्यों को दिए जो एक ही परिवार के सदस्य हैं।
कायदे से एक परिवार के दो या दो से अधिक सदस्यों को प्लॉट नहीं दिए जा सकते। श्री सिंथेटिक्स के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी के आठ सदस्यों को भूखंड देने से ही पता चलता है कि नियमों को किस कदर ताक पर रखा गया।










