Thursday, Nov 19th, 2009, 6:51 am [IST]  

danik bhaskarजल प्रबंधन के लिए प्राइवेट पार्टनरशिप

Bhaskar News

नई दिल्ली. दिल्ली में जल प्रबंधन के लिए सरकार प्राइवेट पार्टनरशिप का सहारा लेगी। इसकी घोषणा बुधवार को खुद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने की। हालांकि शीला दीक्षित ने दिल्लीवालों से पानी की बचत करने की आदत डालने को भी कहा है। जल्द ही दिल्ली की तमाम ऊंची इमारतों, बड़े घरों व अधिक भूमि घेरने वाले अन्य भवनों के लिए जल संचय अनिवार्य हो सकता है।



सीआईआई द्वारा जल प्रबंधन के मुद्दे आयोजित एक चर्चा में शीला दीक्षित ने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब इन स्थानों पर जल संचय अनिवार्य कर दिया जाए। हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय शोध व आंकड़े बताते हैं कि आने वाले समय में दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में पानी की जबरदस्त कमी हो सकती है। इस पर मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली में भी पानी की संसाधन सीमित है। पानी की आपूर्ति बेहतर करने का कारगर तरीका पानी की बचत ही है।



दिल्ली में प्रतिवर्ष ३क् प्रतिशत पानी पाइप लाइनों में लीकेज के कारण बर्बाद हो जाता है। लीकेज की सबसे बड़ी वजह पुरानी पड़ चुकीं पाइप लाइनें है। दरअसल ये पाइप लाइनें दिल्ली के तंग रिहायशी इलाकों व अनधिकृत कॉलोनियों में बिछी हुई है।



परेशानी की बात यह है कि इन इलाकों में अधिकांश पाइप लाइनों के ऊपर घर व अन्य प्रकार की इमारतें बनाई जा चुकी है। इसके चलते इन पाइप लाइनों को बदल पाना काफी कठिन है। लीकेज से होने वाले नुकसान को सरकार बचत के जरिए पूरा करना चाहती है। यही कारण है कि जहां बड़ी इमारतों व घरों के लिए जल संचय अनिवार्य बनाने की बात कही जा रही है, वहीं सरकारी इमारतों व कई बाजारों में बारिश का पानी बचाने की मुहिम शुरू भी कर दी गई है।



मुख्यमंत्री का मानना है कि प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत लोग पानी का सही इस्तेमाल करे व वर्षा से मिलने वाले जल का संचय किया जाए तो दिल्ली में पानी की समस्या का हल ढूंढा जा सकता है।



यमुना की सफाई के लिए केंद्र की मंजूरी का इंतजार



मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बुधवार को कहा कि नालों का पानी सीधे यमुना में जाने से रोकने के लिए उनके एक प्रस्ताव पर केंद्र की मंजूरी की प्रतीक्षा की जा रही है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा जल प्रबंधन पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में शीला ने कहा कि इंजीनियर्स इंडिया लि. ने इस परियोजना के लिए अध्ययन किया है। इसमें तीन बड़ी नहरों का इस्तेमाल कि या जाएगा ताकि गटर का पानी सीधे नदी में नहीं गिरे।



उन्होंने कहा कि हम केंद्र द्वारा जल्द किसी नतीजे पर पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि अगले वर्ष से इस परियोजना का काम शुरू किया जा सके। बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सरकार इस परियोजना के लिए केंद्र की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें जल प्रबंधन में दक्षता की जरूरत है और यमुना एक्शन प्लान की तरह हम धन बर्बाद नहीं करना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि जल वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

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