Thursday, Nov 19th, 2009, 6:53 am [IST]  

danik bhaskarबंजर हो रही धरती, बिगड़ रही मिट्टी की सेहत

भास्कर न्यूज

बिलासपुर. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होने लगी है। यह चौंकाने वाला तथ्य नए सर्वे में सामने आया है। इसमें संभाग के तीन जिलों बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिले की मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी पाई गई है। राज्य के कई अन्य जिलों में भी यही स्थिति है। मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने और लंबे समय तक मिट्टी को खेती के लायक बनाने के लिए शासन इन जिलों में ‘भूमि सेहत सुधार’ कार्यक्रम चलाने जा रहा है।



जमीन की घटती उर्वरक क्षमता ने कृषि वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। हाल ही में रायपुर में हुई राज्य स्तरीय बैठक में घटती उर्वरता को लेकर चिंता जताई गई। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जिले की मिट्टी तेजी से अपनी उर्वरक क्षमता खो रही है। प्रयोगशालाओं में मिट्टी के परीक्षण के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चिंताजनक हैं। मिट्टी की अम्लीयता, क्षारीयता के अलावा नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक, आयरन, कॉपर, मैगनीज समेत अन्य पोषक सूक्ष्म तत्व कम होते जा रहे हैं। रासायनिक खाद के अंधाधुंध उपयोग के कारण ऐसी स्थिति बन रही है।

खासकर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश उर्वरक क्षमता के लिए जरूरी होता है। इन तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए मिट्टी परीक्षण के बाद तय मात्रा में रासायनिक खाद डालनी चाहिए, साथ ही मिट्टी की अम्लीयता व क्षारीयता की जांच करानी चाहिए। इसके बाद ही उर्वरक का उपयोग करना चाहिए, लेकिन किसान ऐसा नहीं करते। बगैर परीक्षण कराए ही खेतों में उर्वरक डालने का परिणाम ही है कि इसका प्रभाव अब मिट्टी की सेहत पर पड़ रहा है और पोषक तत्वों की कमी होने लगी है।



किसान इन नियमों का पालन किए बिना ही सहकारी समिति और दुकानों से रासायनिक खाद का उपयोग खेतों में करते हैं। मिट्टी की जांच के लिए कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में चार चलित प्रयोगशालाएं चलाई जा रही हैं, वहीं रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग व बस्तर में प्रयोगशाला की स्थापना की गई है।



अम्लीयता और क्षारीयता के लिए पीएच मान



मिट्टी में अम्लीयता और क्षारीयता भी अधिक होने पर इसका प्रभाव उर्वरकता पर पड़ता है, इसके लिए मिट्टी परीक्षण विभाग में इसका पीएच मान निकालकर जांच करनी चाहिए और उसके बाद उपाय करना चाहिए। मिट्टी का 6 से 8.5 तक पीएच मान को सही श्रेणी में माना जाता है, लेकिन 8.5 से ऊपर होने पर मिट्टी अम्लीय हो जाती है, तब जिप्सम का उपयोग करना चाहिए। इसी प्रकार मिट्टी का पीएच मान कम होने पर क्षारीय हो जाती है, तब उपाय के रूप में चूने का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी की विद्युत चालकता के साथ नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक, आयरन, कॉपर और मैंगनीज सूक्ष्म तत्वों की भी जांच करानी चाहिए।



क्या कहते हैं अधिकारी



मिट्टी परीक्षण विभाग के अधिकारी केके मेहराल कहते हैं कि खेतों में रासायनिक खाद डालने का अलग तरीका होता है, उसका पालन करना चाहिए। अनियमित मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से उसका प्रभाव मिट्टी की उर्वरकता के साथ पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। न्यूनतम दो रुपए शुल्क के साथ किसानों को मिट्टी परीक्षण विभाग में जांच करानी चाहिए।



मिलावटी खाद से भी दुष्प्रभाव



दुकानों में अमानक स्तर पर बिक रहे खाद पर कृषि विभाग पहले भी कई बार कार्रवाई कर चुका है। खाद में मिलावट होने से फसल पर दुष्प्रभाव पड़ता। तय मात्रा से अधिक उर्वरक के उपयोग से मिट्टी की उर्वरकता कम हो जाती है और उसका असर पैदावार पर पड़ता है।

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