पराई जमीन पर बांट दिए प्लॉट
जोधपुर. जिस जमीन को अपनी बताकर तत्कालीन नगर सुधार न्यास ने भूखंड काट कर बेच दिए वह तो उनकी थी ही नहीं। इसके बावजूद जमीन को अपनी मानते हुए न सिर्फ जिम्मेदारों ने वहां आवासीय योजना का कागजी खाका बना डाला बल्कि भूखंड बेचकर लीज वसूली भी शुरू कर दी। जब भूखंड के मालिक जमीन का कब्जा लेने पहुंचे तो हकीकत सामने आई।
लोगों ने अपनी जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश की तो कानूनी दांवपेच के चलते न तो कब्जा मिला और न ही जेडीए ने उन लोगों को दूसरी जगह भूखंड देने की पहल की। आज से बीस बरस पहले जिन लोगों ने अपना भूखंड खरीद कर आशियाना बनाने का ख्वाब संजोया था वह अब तलक पूरा नहीं हो पाया है। मामला शोभावतों की ढाणी का है जहां भूखंड के मालिक आज भी भूखंड पर कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
बिना अवाप्त किए ही बेच दिए
तत्कालीन नगर सुधार न्यास ने शोभावतों की ढाणी योजना में एक ऐसे खसरे की जमीन भी शामिल कर ली जिसे अवाप्त नहीं किया गया था। इस पर भूखंड काट दिए और उन्हें आवंटित भी कर दिया गया। गौरतलब है कि वर्ष 1956 में प्रकरण संख्या 397/1956 का निस्तारण करते हुए तत्कालीन एसडीएम ने 28 नवंबर 1956 को काश्तकार को पट्टा जारी कर दिया।
बाद में वर्ष 1988 में तत्कालीन जिला कलक्टर ने जमीनों का सर्वे करवाया था और शोभावतों की ढाणी के कुछ खसरों की खातेदारी निरस्त कर जमीन का सेट अपार्ट करते हुए उसे नगर सुधार न्यास को दे दी।
न्यायालय में मिला न्याय
कलक्टर के आदेश के खिलाफ एक काश्तकार ने एक जुलाई, 1988 को दावा पेश किया, जिसे न्यायालय ने सरकार व नगर सुधार न्यास के विरूद्ध 1991 में दावा पेश करने की तारीख में निषेधाज्ञा जारी कर प्रार्थियों के हक में फैसला कर दिया। साथ ही राजस्व अपील अधिकारी की अदालत में अपील पेश की जिसे 12 फरवरी, 04 को स्वीकार कर लिया गया।
बाद में सरकार ने राजस्व मंडल में पुनर्निरीक्षण याचिका व रिव्यू पिटीशन दायर की जिसे राजस्व मंडल ने खारिज कर दिया। बाद में कलक्टर के आदेश पर तहसीलदार ने उस जमीन की खातेदारी दर्ज कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर, 08 को तत्कालीन नगर सुधार न्यास की ओर से पेश विशेष अनुमति अपील को खारिज कर दिया गया और अंतिम फैसला काश्तकार के हक में कर दिया गया।
तब से इस जमीन पर तत्कालीन यूआईटी (अब जेडीए) का कब्जा हट गया लेकिन इस बीच इस खसरे पर भूखंड काटकर बेचे जा चुके थे। अब जब कब्जा देने की बात आई तो जेडीए पैमाइश कराने के बाद आवंटनधारियों को कहीं और प्लॉट देने की बात कह रहा है।
गलत किया था, हम जांच करवा रहे हैं
जेडीए आयुक्त गौरव गोयल से डीबी स्टार की सीधी बात
तत्कालीन यूआईटी ने बिना भूमि अवाप्त के शोभावतों की ढाणी में योजना बनाकर भूखंड बेच दिए?
गलत ही किया था लेकिन अब हम चैक करवा रहे हैं।
अब उनका क्या होगा जिन्होंने वहां भूखंड खरीदे हैं?
हम उस जगह के तमाम ऐसे खसरों की पैमाइश करवा रहे हैं जिसमें भूखंड काटे गए थे। बाद में उन लोगों को एक व्यवस्था के तहत अन्य स्थान पर भूखंड देने की कार्रवाई करेंगे। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
जो अपनी जमीन पर बैठे हैं, उन पर जेडीए की दखलअंदाजी क्यों?
ऐसा नहीं है। दरअसल वे कागजों में तो खसरे के मालिक हैं लेकिन वह खसरा कहां से कहां तक आता है, उसकी पैमाइश करानी बाकी है। तभी सही मायने में निर्णय हो पाएगा कि किसकी जमीन कहां तक है।
यह कौन और कब कराएगा?
जो जमीन हमारी योजना में आ रही है, उसकी हम कराएंगे। शेष तहसील स्तर पर होगी।
हमें तो ठग लिया गया
यहां भूखंड लेने वाले और लीज भर रहे बजरंग राठी का कहना है कि पहले तो ऐसी जगह पर जहां कानूनी प्रक्रिया जारी थी, हमें भूखंड देकर ही हमें ठगा गया और बाद में अब जब जेडीए उक्त जमीन पर अपनी दावेदारी ही नहीं रखता तो हमें कहीं अन्य जगह पर प्लॉट न देकर हमारे साथ खिलवाड़ कर रहा है।
दस सालों से लीज राशि भर रहे जसराज छाजेड़ का कहना है कि पता नहीं हमें जमीन का कब्जा कब मिलेगा। जब भी भूखंड पर कब्जा देने की बात करते हैं तो कोई सुनता ही नहीं। रामस्वरूप प्रजापत ने शोभावतों की ढाणी में पूर्वी पाल योजना में भूखंड ले रखा है। उनके अनुसार अब पता नहीं हमें कहां जमीन मिलेगी।










