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Thursday, Nov 19th, 2009, 7:14 am [IST]  

danik bhaskarनहीं बदली धुंध में सिग्नल बताने की पद्धति

Bhaskar Correspondent

पानीपत. रेलवे विभाग आज भी कोहरे से निपटने के लिए 150 साल पुरानी पद्धति पर निर्भर है। कोहरे में रेलगाड़ी के ड्राइवर को सिग्नल बताने का आज तक कोई नया तरीका इजाद नहीं किया जा सका है। ड्राइवर को आज भी कोहरे में सिग्नल दिखाने के लिए पटरियों पर पटाखें रख कर सचेत किया जाता है। विभागीय अधिकारी भी इस मामले में अन्य तरीका न होने की बात कहते हैं।



ऐसे होते हैं सचेत



कोहरे में रेलगाड़ी के ड्राइवर को सिग्नल नहीं दिखाई देता। इसी समस्या के तहत रेलवे ट्रैक पर सिग्नल से 170 मीटर की दूरी पर स्पेशल पटाखे लगाए जाते हैं, जिनके ऊपर से जैसे ही रेलगाड़ी गुजरती है तो ये जोरदार आवाज के साथ फट जाते हैं। पटाखे की आवाज सुनकर ड्राइवर सचेत हो जाता है तथा उसे पता लग जाता कि आगे सिग्नल है।



44 मीटर दूर खड़ा होता फॉग मैन



इन पटाखों की आवाज इतनी जोरदार होती है कि पटाखे लगाने वाले फॉग मैन को कम से कम 44 मीटर दूर खड़ा होना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति इससे कम दूरी पर पटाखे के संपर्क में आता है तो उसकी सुनने की क्षमता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।



10 साल है स्पेशल पटाखों की उम्र



विभाग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इन पटाखों की उम्र ब्रांच लाइन पर 10 साल के करीब होती है। इसके अलावा मेन लाइन पर इस्तेमाल करने के लिए इनकी उम्र 7 साल ही निर्धारित की गई है। इसके बाद ये पटाखें बेकार हो जाते हैं।



पानीपत रेलवे स्टेशन है पटाखों का स्टॉक



पानीपत रेलवे स्टेशन पर स्पेशल पटाखों का स्टॉक है। स्टेशन पर इस समय लगभग 400 पटाखों का स्टॉक पड़ा है। अधिकारियों का मानना है कि इस स्टॉक से इस सीजन की सर्दियां आराम से निकलेंगी। इसके अलावा वे अन्य जगहों पर पटाखें सप्लाई भी कर सकते हैं।



पटाखा सिस्टम के सिवाय अभी तक कोई नया तरीका अस्तित्व में नहीं आया है। इसी सिस्टम के तहत ही काम करना पड़ रहा है और पानीपत स्टेशन पर पटाखों का स्टॉक इस समय पूरा है। - धीरज कपूर, स्टेशन अधीक्षक, पानीपत

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