मैं दूंगा कॉटेज
जोधपुर. 1988 में एमजीएच के नर्सिग अधीक्षक पद से रिटायर हुए बंशीलाल का मोह अभी अस्पताल में बिताए लम्हों से छूट नहीं रहा। वे अभी भी वहां जा रहे हैं और बेखौफ कॉटेज वार्ड आवंटित कर रहे हैं। हैरानी की बात करीब 20 बरसों से वे बदस्तूर यह काम कर रहे हैं लेकिन न तो महात्मा गांधी अस्पताल के जिम्मेदारों ने उन्हें मना किया और न ही नर्सिग अधीक्षक बने अफसरों ने उन्हें टोका।
हालत यह है कि कॉटेज वॉर्ड आवंटित कराने के लिए पूछताछ करने पर सभी बंशीलाल से ही मिलने की सलाह दे देते हैं। इसलिए नर्सिग अधीक्षक की बजाय बुजुर्ग बंशीलाल को ढूंढना पड़ता है क्योंकि इससे संबंधित कागजात भी उन्हीं के पास रहते हैं। जागरूक पाठक की सूचना पर जब डीबी स्टार टीम ने आरएमओ कक्ष में छापा मारा तो बंशीलाल वहां बैठे मिल गए।
उनके पास सरकारी दस्तोवजों की फाइल भी थी। हालांकि उस वक्त डच्यूटी पर नर्सिग स्टॉफ उर्मिला सांखला भी मौजूद थीं। कॉटेज आवंटित करने के बारे में पूछा तो बंशीलाल बोले कि यहां कॉटेज आवंटित कराने के लिए लंबी प्रक्रिया है और मरीज व उनके परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसलिए मैं उनकी मदद के लिए आ जाता हूं। वैसे मुझे कभी किसी ने रोका भी नहीं।
वे तो जनसेवा कर रहे हैं
एमजीएच में कॉटेज वार्ड आवंटित करवाने के लिए प्रक्रिया के बारे में पूछा तो बताया गया कि आप तो बंशीलाल से मिल लो, पूरा काम हाथोंहाथ हो जाएगा। यह पूछने पर कि बंशीलाल कौन हैं और कहां बैठते हैं तो पता चला कि वे आरएमओ कक्ष में बैठते हैं। डीबी स्टार टीम आरएमओ कक्ष में पहुंची तो बंशीलाल वहां बैठे थे।
कॉटेज लेने के बारे में पूछा तो बोले कि आ जाना, मैं करवा दूंगा। स्टाफ के बारे में पूछा तो बोले कि यहीं कहीं होगा और मैं तो अक्सर यहां बैठता हूं। बंशीलाल 18 साल तक एमजीएच में नर्सिग स्टॉफ अधीक्षक रहे और करीब 20 साल पहले रिटायर हो गए थे। रिटायरमेंट के बावजूद वे अक्सर यहां आ जाते हैं, सरकारी दस्तावेजों व कार्य में दखल देते हैं।
हैरानी की बात यह है कि उन्हे न तो किसी ने यहां कार्य करने की इजाजत दी है लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी इस पर है कि उन्हें इतनें सालों में भी किसी ने रोका-टोका नहीं। बंशीलाल के अनुसार वे अपनी मर्जी से यहां आते हैं और जरूरतमंद लोगों की सहायता करते हैं। टीम ने जब आगे छानबीन की तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि आरएमओ कक्ष मंे एक ही नर्सिग स्टाफ है और उसकी ड्यूटी दो बजे तक ही है।
दो बजे बाद कॉटेज आवंटित ही नहीं होते। बंशीलाल के कॉटेज आवंटित करने के बारे में जब जिम्मेदारों से पूछा गया तो वे कहने लगे कि बंशीलाल तो जनसेवा कर रहे हैं। उर्मिला सांखला ने कहा, मेरे पीछे यह क्या करते हैं? मुझे नहीं पता। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीपी पूनिया कहने लगे कि यह तो अस्पताल अधीक्षक ही बता सकते हैं, मुझसे तो किसी ने इसकी स्वीकृति नहीं ली।
यूं पकड़ में आया मामला
जागरूक पाठकों की इस संबंध में लगातार शिकायतें डीबी स्टार को मिल रही थीं। डीबी स्टार ने बंशीलाल पर एक सप्ताह तक नजर रखी। वे आरएमओ कक्ष को अपना ही दफ्तर समझ रहे थे। रिपोर्टर उनके पास मरीज का परिजन बन कर गया तो वे आरएमओ कक्ष में मुख्य कुर्सी पर बैठे थे। दस्तावेज भी उनके पास थे और कॉटेज की चाबियां भी वे ही संभाले हुए थे। बुधवार को टीम फिर एमजीएच गई तो वे आरएमओ कक्ष में ही बैठे थे और एक मरीज को कॉटेज आवंटित कर रहे थे।
ऐसा है तो हम उन्हें मना कर देंगे
एमजीएच के अधीक्षक डॉ. डीआर माथुर से सीधी बात
कॉटेज आवंटित करने का काम कौन देखता है?
यह काम उपअधीक्षक देखते है।
लेकिन वहां तो रिटायर्ड नर्सिंग अधीक्षक बंशीलाल कॉटेज आवंटित कर रहे हैं?
वे तो जनसेवा कर रहे हैं।
जनसेवा का मतलब यह तो नहीं कि वे सरकारी दस्तावेज व पैसे भी अपने पास रखें?
ऐसा नहीं है। वे अनपढ़ लोगों की मदद कर देते हैं।
मदद के लिए और भी दूसरे काम हैं। यही काम क्यों सूझा? इसमें कोई दूसरा हित तो नहीं?
अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा है तो उन्हें मना कर देंगे।










