तहसील में दिनभर रहे लोग परेशान
पानीपत. तहसीलदार और नायब तहसीलदार के निलबंन के बाद नए अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। बुधवार को लोगों को अपने काम के लिए पूरे तहसील में भटकना पड़ा। काम नहीं होने पर खाली बैठे तहसील कर्मचारियों ने तहसील बंद करवा दी और वसीका नवीसों की भी दुकानें बंद करवा दी।
तहसील कार्यालय में लगभग दो घंटे तक जमकर हंगामा हुआ लेकिन कोई भी आला अधिकारी नहीं पहुंचा। दोपहर बाद पार्षद हरीश शर्मा ने वसीका नवीसों से अपील कर किसी तरह दुकान खुलवाई। हालांकि तहसील खुलने के बाद भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो सका, केवल बयान-हल्फिया जैसे छोटे काम ही पाए।
11 बजे बंद करवाई थी दुकान
बुधवार सुबह लगभग 11 बजे तहसील कार्यालय में काम कर रहे वसीका नवीस और स्टाम्प विक्रेता की दुकान बंद करवा दी गई। ये सभी दुकान दो—तीन वसीका नवीसों तथा तहसील कर्मचारियों के कहने पर बंद करवाई गई। तकरीबन दो घंटे तक वसीका नवीस तहसील कार्यालय में ही जमा रहे, इसके बाद लगभग 1 बजे पार्षद हरीश शर्मा ने लोगों की परेशानी बताते हुए सभी दुकान खुलवा दी।
नहीं था कोई कारण
तहसील में दुकान बंद क्यों करवाई के सवाल का जवाब किसी भी वसीका नवीस पर नहीं था न ही कोई वसीका नवीस खुलकर सामने आया। कुछ वसीका नवीसों ने बताया कि तहसील के अकाउंट कार्यालय के कर्मचारियों ने दुकान बंद करवाई तथा कुछ ने बताया कि दो—तीन वसीका नवीसों के कहने पर दुकानें बंद करवाई गई। वहीं कुछ वसीका नवीस तहसीलदार की अनुपस्थिति में काम न होने को कारण बता रहे थे।
करोड़ों रुपए का हुआ नुकसान
तहसीलदारों के निलंबित होने के बाद से बुधवार तक लगभग करोड़ों रुपए का काम बाधित हुआ। तहसीलदार के न होने से रजिस्ट्रियां नहीं हो रही हैं और रजिस्ट्री न होने से स्टाम्प भी नहीं खरीदे जा रहे, जिसके कारण राजस्व को करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है।
लोग रहे परेशान
दो घंटे तक तहसील में चली दुकानें बंद करवाने और खोलने की कार्रवाई के कारण लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस बारे में कुछ लोगों से बातचीत की गई, जिन्होंने अपनी परेशानियों के बारे में इस प्रकार बताया।
एफिडेविट बनवाने के लिए कई दिनों से चक्कर काट रहा हूं। पहले तो रिश्वत देकर इसे सत्यापित करवाया, अब तहसीलदार के साइन नहीं हो रहे। नौकरी के लिए अप्लाई करना है, जिसकी अंतिम तिथि भी आज निकल जाएगी। — जसवंत सिंह, पानीपत।
करनाल से रजिस्ट्री के लिए आए थे। रजिस्ट्री हो नहीं पाई, जिसके कारण अब दोबारा आना पड़ेगा। यहां आने के लिए छुट्टी लेनी पड़ती है, पहले भी कई बार तहसील कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन काम नहीं हो रहा। — वीरेंद्र, करनाल।
सिर्फ एक एफिडेविट के लिए उन्हें 5 दिन हो गए चक्कर काटते हुए। एफिडेविट पर तहसीलदार के साइन करवाने हैं। यदि एक साइन के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ेगी तो किसी बड़े काम में जान ही निकल जाएगी। — पं. रमेश चंद्र शर्मा, जावा कालोनी, पानीपत।










