फर्जी सर्टीफिकेट जमा कराने पर 3 साल कैद
हिसार. सिपाही भर्ती होने के लिए जाली शैक्षणिक प्रमाण पत्र देने के जुर्म में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने सिरसा के गांव चक्का निवासी महेंद्र पाल को 3 साल की कैद और 3500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर उसे दो माह की अतिरिक्त कैद भी भुगतनी होगी।
पुलिस ने इस बारे में 22 अगस्त 2003 को केस दर्ज किया था। अभियोग के अनुसार महेंद्र पाल ने पुलिस में सिपाही भर्ती होने के लिए आवेदन किया था। पुलिस ने उसके दसवीं कक्षा के प्रमाण पत्र की जांच के लिए वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संपर्क किया था। तब प्रमाण पत्र जाली मिला।
प्रमाण पत्र जाली होने की रिपोर्ट आने पर थर्ड बटालियन के कमांडेंट सत्यप्रकाश रंगा ने एसपी को पत्र लिखकर आवेदन करने वाले युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। सदर थाना पुलिस ने इस बारे में धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया था। पुलिस ने बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने सवा छह साल की सुनवाई के बाद आरोपी को धोखाधड़ी और जालसाजी का दोषी माना।










