सड़कों पर शोर, दफ्तरों में सन्नाटा
कोटा. चुनाव करीब होने के साथ ही इसका असर सरकारी कार्यालयों पर दिखाई देने लगा है। सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों की नगर निगम चुनाव में डच्यूटी लगने के कारण ज्यादातर कार्यालयों में दिनभर सन्नाटा छाया रहता है। कर्मचारी मौजूद नहीं होने से नागरिकों के काम नहीं हो पा रहे हैं, उन्हें चुनाव बाद आने की बात कहकर टाला जा रहा है। नगर निगम, जिला कलेक्ट्री, यूआईटी तथा जलदाय विभाग कार्यालय जाकर हालात जाने तो यह हकीकत सामने आई।
कार्यालयों में खाली पड़ी कुर्सियां
नगर निगम, नगर विकास न्यास तथा जलदाय विभाग के कार्यालय में भी कामकाज ठप दिखाई दिया। भास्कर फोटो जर्नलिस्ट ने जब कैमरा निकाला तो कर्मचारी कुर्सियों पर बैठने लगे। जो कर्मचारी बाहर बैठे थे वे भी भागकर आ गए। पूछने पर कर्मचारियों ने बताया कि यहां के कर्मचारियों की चुनाव में डच्यूटी लगा रखी है, कामकाज तो बाधित होगा ही।
अगर कर्मचारी चुनाव डच्यूटी में नहीं जाते हैं तो उनको नोटिस मिल जाते हैं, ऐसे में खुद के कार्यालय के काम से ज्यादा कर्मचारियों को चुनाव डच्यूटी की चिंता रहती है। कर्मचारियों का कहना था लोग समस्याएं लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। उन्हें चुनाव डच्यूटी का हवाला देकर समझाने की कोशिश करते हैं तो वे भड़क जाते हैं।
काम पेंडिंग, कर्मचारी होंगे परेशान
सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को चुनाव डच्यूटी में लगाने के बाद उनका कामकाज ठप हो जाता है। जो कर्मचारी चुनाव डच्यूटी में लगाया जाता है उसका कामकाज कोई दूसरा कर्मचारी नहीं करता जिससे काम पेंडिंग हो जाता है। चुनाव डच्यूटी में व्यस्त रहने के कारण वह स्वयं के कार्यालय के काम पर ध्यान नहीं दे पाता है। चुनाव संपन्न होने के बाद जब वह वापस लौटता है तो काम दस गुना बढ़ जाता है। बाद में कर्मचारी को देर शाम तक कार्यालयों में रहकर अपना पेंडिंग काम पूरा करना पड़ता है।
पेंशन की टेंशन ने लगवाए चक्कर
कलेक्ट्रेट में दोपहर 1 बजे अधिकांश कमरे खाली पड़ हुए थे। कुछ कमरों में इक्का—दुक्का कर्मचारी काम कर रहे थे। कसार से आई वृद्धा कंवरीबाई व धापूबाई ने बताया उन्हें पिछले तीन महीने से विधवा पेंशन नहीं मिली। पेंशन की टेंशन दूर करने के लिए वे सुबह साढ़े 10 बजे कार्यालय आ गई थीं तथा संबंधित विभाग के बाबू के पास जाकर प्रार्थना पत्र दे दिया था।
लेकिन दो घंटे बाद भी उनका काम नहीं हुआ। दोपहर एक बजे बाद तीसरी बार महिलाएं बाबू के पास गई तो उन्हें यह कहा कि कर्मचारी चुनाव डच्यूटी में है ऐसे में प्रार्थना—पत्र देकर चली जाओ। जब दोनों ने प्रार्थना—पत्र तीन बार पहले देने की बात कही तो कर्मचारी ने कहा कि मैंने रजिस्टर में नोट कर लिया है आपकी पेंशन मिल जाएगी।
इसके आगे जब ग्रामीण महिलाएं कुछ बोलने लगी तो वहां तैनात बाबू ने उन्हें डांटकर बाहर कर दिया। इसी प्रकार द्वारिका बाई भी अपनी बहन मंजूबाई का विकलांग प्रमाण—पत्र की समस्या को लेकर चक्कर काटती दिखाई दी। द्वारिका ने बताया कि उसकी बहन दूसरे स्थान पर रहने लगी है ऐसे में पता बदलने के लिए प्रार्थना—पत्र देना था, लेकिन दो घंटे बाद भी उनसे एप्लीकेशन नहीं ली गई। कलेक्ट्रेट में कई लोग भटकते दिखाई दिए।










