जीएसटी से आसान होगा करारोपण
अजमेर. वाणिज्यिक कर महकमे के अतिरिक्त आयुक्त हरसहाय मीणा ने कहा कि 1 अप्रैल 2010 से लागू होने वाला गुड्स एंड सर्विस टैक्स ट्रेड और इंडस्ट्री के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
इससे फैक्ट्री संचालकों और निर्माताओं की टैक्स से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का समाधान होगा। महकमा जीएसटी के लिए राज्यभर से प्रस्ताव और सुझाव आमंत्रित कर रहा है। टैक्स आय में वृद्धि के लिए राजस्थान के उद्योगपतियों और व्यापारियों की सुविधा के अनुरूप प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से भेजा जाएगा।
बुधवार को कर भवन में जीएसटी पर आयोजित सेमिनार में मीणा ने कहा कि सीजीएसटी, आईजीएसटी और एसजीएसटी लागू होने के बाद से टैक्सेशन में आ रही दिक्कतें दूर होंगी। व्यापारियों और उद्योगपतियों को राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न करों को लेकर परेशानी रहती है।
मौजूदा सिस्टम की खामियां दूर करने के लिए ये टैक्स लागू किए जा रहे हैं। चार्टडर्र् अकाउंटेंट सुनील हालाखंडी ने बताया कि थ्रैशहोल्ड स्कीम के तहत केंद्र सरकार छूट की सीमा को 1 करोड़ 50 लाख से बढ़ाने, स्टेट गुड्स सर्विस टैक्स में छूट की सीमा 10 लाख से अधिक करने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एसजीएसटी फैक्ट्री में निर्मित वस्तु पर नहीं बल्कि उसकी सप्लाई होने के बाद लगेगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत सामान के निर्यात पर टैक्स से मुक्ति रहेगी, उन्हें निर्यात के लिए अधिक सुविधाएं देने पर भी विचार किया जाएगा।
प्रमुख व्यापारी जोगेंद्र सिंह ने कहा कि टैक्स चुकाने की प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए। व्यापारी टैक्स चुकाने को तैयार रहता है। लेकिन प्रक्रिया की पेचीदगी से डरता है, एक ही जगह टैक्स जमा हो जाए तो दिक्कत नहीं रहेगी।
सुनील गोयल ने कहा कि व्यापारी जो प्रस्ताव दें उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। सेमिनार में अतिरिक्त वाणिज्यिक कर आयुक्त वैट विजय कुमार शर्मा, अतिरिक्त वाणिज्यिक कर आयुक्त एंटीविजन आलोक विद्यार्थी, उपायुक्त अजमेर सुनील शर्मा, एबीएल माथुर, मीना शर्मा, शिल्पी शर्मा और सुनील विजय आदि वाणिज्यिक कर अधिकारी मौजूद थे।










