राजस्थान में किताबों से हटा ‘भगवा’ अंश
बीकानेर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आधा शिक्षा सत्र बीतने के बाद पाठ्यक्रमों से विवादित अंश आखिर हटा ही दिए। अर्धवार्षिक परीक्षा को देखते हुए हटाए गए पैरा, पंक्तियां और अध्याय की सूचना प्रिंटिंग प्रेस में भेजी गई है, ताकि प्रश्न-पत्रों से उन्हें बाहर रखा जा सके। शिक्षा सत्र 2009-10 जुलाई में शुरू हुआ था।
उसके बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रमों के भगवाकरण का मसला उठ खड़ा हुआ। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में बोर्ड के पाठ्यक्रमों में जोड़े गए अंशों और अध्यायों पर आपत्तियां प्रकट की गईं। कक्षा नौ से 12 वीं तक के सामाजिक विज्ञान प्रथम व द्वितीय, राजीतिक विज्ञान, संस्कृत आदि कई विषयों में पैरा, पंक्तियां और अध्याय तक को विवादित करार देते हुए हटा दिया गया है।
पाठ्यक्रमों से विवादित अंशों को हटाने के आदेश बोर्ड ने छह नवंबर को जारी किए थे लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और जिला समान परीक्षा योजना समन्वयकों के पास इसके आदेश अब पहुंचे, जबकि अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र तैयार कर छपने के लिए प्रिंटिंग प्रेस में भेजे जा चुके हैं।
विवादित अंशों को प्रश्न-पत्रों से हटाने के लिए जिलों में अब भागमभाग मची हुई है। बोर्ड के सचिव की ओर से जारी पाठ्यपुस्तकों में संशोधन से संबंधित आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि विद्यालय स्तरीय विभिन्न परीक्षाओं परख, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा में विवादित अध्याय, पैरा अंश, वाक्य और शब्द पर किसी भी प्रकार का प्रश्न नहीं पूछा जाएगा। विषय अध्यापकों को परिपत्र में दिए गए निर्देशानुसार ही शिक्षण करवाने के लिए पाबंद किया गया है।
बोर्ड से संशोधित परिपत्र मिल गया है। परीक्षा की दृष्टि से परिपत्र की प्रतियां पेपर सेटर्स को दी गई हैं। संबंधित विषय से विवादित अंश हटाने के बाद पेपर तैयार किए जाएंगे। यह सूचना प्रिंटिंग प्रेस को भी दी जाएगी। - के.डी.पालीवाल, समन्वयक, जिला समान परीक्षा (माध्यमिक)










