चुपके से चीर दीं पहाड़ियां
भीलवाड़ा. ख्यातनाम जिंदल सॉ लि. को तिरंगा सहित सात गांवों की पहाड़ियों में खनन की स्वीकृति मिलने से पहले ही इस क्षेत्र को माफियाओं की नजर लग गई है।
वे इन्हें एक से डेढ़ हजार फीट लंबे, चार-पांच फीट चौड़ाई व गहराई में काट कर तांबा, लेड, लोह अयस्क सहित अन्य बेशकीमती खनिज चुरा ले गए हैं। यह अवैध खनन अभी भी जारी है। इससे खनिज विभाग को राजस्व का नुकसान तो हुआ ही है, माफियाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है।
पुर कस्बे की तिरंगा पहाड़ियों, मालोला, धूलखेड़ा, ओंकारपुरा, ढेढवास, समोड़ी एवं सुरास गांव से सटी पहाड़ियों को खनन माफियाओं की नजर लग गई है। ‘भास्कर’ ने मोहन मंगरी से होते हुए पुर की तिरंगा पहाड़ियों से मालोला तक 14 किमी पहाड़ी क्षेत्र का दौरा किया।
तिरंगा पहाड़ियों पर लगभग चार-चार फीट गहरी, इतनी ही चौड़ी ट्रेंच बनी हुई थी। इसकी लंबाई एक से डेढ़ हजार फीट तक थी। तिरंगा पर लोह अयस्क प्रचुर मात्रा में बताया जाता है। यहां से दरीबा, समोड़ी, धूलखेड़ा, ढेढवास की पहाड़ियां भी देखीं। खनन माफियाओं ने चोरी-छिपे पहाड़ियों पर कहीं आड़े तो कहीं तिरछे ट्रेंच (गड्ढे)बना दिए। यहां से बेशकीमती खनिज गायब है।
धूलखेड़ा व मालोला की पहाड़ियों में तांबे की बहुतायत है। यहां से कुछ दूर चित्तौड़ बायपास पर सड़क किनारे पहाड़ियों का खनिज पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े भी पड़े हुए मिले, जिससे लगता है कि खनन माफिया वहां से ट्रक में भर कर ले गए।
ग्रामीणों का कहना है कि एक बड़ी कंपनी के लोग मशीनें लेकर आए थे। उन्होंने खनन की सरकार से स्वीकृति होने की बात भी कही, जबकि अभी तक खनिज विभाग द्वारा किसी भी कंपनी को इन पहाड़ियों पर खनन की स्वीकृति जारी नहीं की गई है।
जिंदल की नजर इसी पर
जिंदल सॉ लि. ने भीलवाड़ा तहसील के ग्राम पुर, मालोला, धूलखेड़ा, ओंकारपुरा, डेडवास, समोड़ी एवं तहसील मांडल के ग्राम सुरास के 1556.78 हैक्टेयर क्षेत्र में खनन की स्वीकृति मांगी है। कंपनी की फाइल अभी पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में है। 16 अक्टूबर को जन सुनवाई हो चुकी है।










