नौकरी, चाकरी, वेतन और तनख्वाह में फ़र्क़ बताओ
संतालाल जी एक होटल में ख़ाली कटोरी में रोटी डुबो-डुबो कर खा रहे थे।
वेटर बंता ने पूछा: मास्टरजी ख़ाली कटोरी में कैसे खा रहे हैं? संतालाल: भइया, हम गणित के अध्यापक हैं। और दाल हमने ‘मान ली’ है।
- वसीम जावेद, सीकर (राज)
संता: नौकरी, चाकरी, वेतन और तनखा (तनख्वाह) में फ़र्क़ बताओ।
बंता: पहले एक कमाता था, नौ खा लेते थे, इसलिए वह नौकरी थी। फिर एक कमाता था, चार खा लेते थे, इसलिए वह चाकरी थी। फिर कमाई इतनी रह गई कि ख़ुद के तन का पालन-पोषण ही हो सकता है, तो वह हो गई तनखा। अब तो तन को भी पूरा नहीं पड़ता, इसलिए कहते हैं वेतन।
- सुरेंद्र हयारण, लाली (गुज)
संता: लॉकअप को हिंदी में हवालात क्यों कहते हैं? बंता: क्योंकि वहां सिर्फ़ हवा और लात मिलती है।
- अशोक परमार, बेहपुर (मप्र)
संता सड़क पर बेहोश हो गया। उसके इर्द-गिर्द भीड़ जा हो गई। लोग उसे होश में लाने के लिए अपनी-अपनी सलाह देने लगे। बुढ़िया बंता बोली: इसे ब्रांडी दे दो। किसी ने कहा कि िमुंह में पानी डालो।
बुढ़िया फिर बोली: अरे, इसके मुंह में दो घूंट ब्रांडी डाल दो। तभी कोई कहने लगा कि इसे अस्पताल ले चलो। इतने में बेहोश पड़ा संता उठ बैठा और कहने लगा: आप सब अपनी बकवास बंद कीजिए और उस बेचारी बुढ़िया की बात भी सुनिए।
- अमित कोचले, खरगोन (मप्र)
संता के बेटे बंता ने कहा: पापा, मुझे स्कूल का फार्म भरना है। यह बता दीजिए कि मदर्स टंग में क्या लिखूं? संता बोला: बेटा, लिख दे कि बहुत लंबी है।
-जे.पी.सिंह काका, भोपाल (मप्र)










