6 महीने में आया था हिमयुग
एक नई रिसर्च से पता चला है कि गर्म और धूप से खिले रहने वाले यूरोप को बर्फ से ढंकने में सिर्फ 6 महीने का वक्त लगा था। पुराने अध्ययनों के अनुसार 13 हजार साल पहले वहां हिमयुग शुरू होने में करीब एक दशक का वक्त लगा था। वहीं अब वैज्ञानिकों को लगता है कि ये काम 20 गुना ज्यादा तेजी से हुआ था।
हॉलीवुड की ब्लॉक बस्टर फिल्म द डे आफ्टर टूमॉरो में जिस तरह दिखाया गया था कि उत्तरी गोलार्ध अचानक बर्फ जमने लगी थी और आर्कटिक से दक्षिण में सैकड़ों मील तक फैल गई थी। इस रिसर्च के प्रमुख जिओलॉजिकल साइंस प्रोफेसर विलियम पैटरसन कहते हैं कि उस समय के लोगों के लिए ये सब अचानक हुआ होगा।
आर्कटिक से लेकर ब्रिटेन को बर्फ से कवर करने में सिर्फ चंद महीनों का वक्त लगा होगा। मौसम में होने वाली तब्दीली पर वे काफी समय से अध्ययन कर रहे थे। उनके अनुसार पृथ्वी का वातावरण अस्थायी है और किसी भी समय तेजी से गर्म स्थान को ठंडे स्थान में बदल सकता है।
1300 साल तक रहा था हिमयुग
ये रिसर्च न्यू साइंटिस्ट जरनल में छपी हैं। पश्चिमी आयरलैंड की लॉघ मॉनरिएघ झील से लिए गए मिट्टी के नमूनों पर ये रिसर्च की है। विज्ञान के लिहाज से इस इलाके की मिट्टी दुनिया में सबसे अच्छी है। प्रोफेसर विलियम ने इस मिट्टी की 0.5 एमएम की परतें उखाड़ने के लिए प्रिसीशन रोबोटिक स्कैल्पल का प्रयोग किया। हर परत को तीन महीने में जमने वाली परत माना गया। इनसे कम समय में होने वाले तापमान के अंतर को नापा गया।
पता चला कि झीलों के पौधे और जानवर अगर तेजी से मरने लगें तो तापमान तेजी से गिरने लगता है। उस समय की मिनी आइस एज सिर्फ 1300 साल तक रही थी। कनाडा की एगासिज झील के अचानक खाली हो जाने से आइस एज आई थी। अचानक इस झील के किनारे टूट गए थे और पानी बहकर नॉर्थ एटलांटिक और आर्कटिक सागर में चला गया था।
इस तरह गल्फ स्ट्रीम डिस्टर्ब हो गई होगी और तापमान गिरने लगा होगा। कुछ वैज्ञानिकों को लगता है कि अगर ग्रीनलैंड के आइस कैप पिघलने लगेंगे तो समुदों का बहाव प्रभावित होगा और इस तरह के नतीजे देखने को मिल सकते हैं।










