अतिक्रमण हटाने का अभियान छेड़ा
कुल्लू. प्रदेश सरकार ने बंद भूमि पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी कर दिए हैं। भाजपा सरकार के पूर्व कार्यकाल में बंद भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले उन लोगों से कब्जा नियमित करने के लिए मिसल व हलफिया बयान लिये थे लेकिन अब सरकार ने उन कब्जाधारियों को नोटिस देकर कब्जा छोड़ने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2002-03 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रदेश के हजारों किसानों से नाजायज कब्जों के मिसलें मांगी थी लेकिन अब उन्हीं लोगों पर गाज गिर रही है।
सरकार के निर्णय का किया विरोध
प्रदेश में इस समय 3 लाख 50 हजार परिवारों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। सरकार के इस निर्णय का हिमालयन नीति अभियान समिति के प्रदेश संयोजक गुमान सिंह व भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति के अध्यक्ष नंदलाल शर्मा ने सीएम के नाम एक खुला पत्र लिखकर सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है।
उन्होंने इसे गैर कानूनी व जन भावनाओं की अवहेलना करार दिया है। समिति का कहना है कि यह प्रक्रिया अनूसूचित जनजाति व परंपरागत अन्य वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून 2006 की अवहेलना है। समिति का कहना है कि प्रदेश में कई किसानों की कृषि व रिहायश भूमि परियोजनाओं में अधिग्रहित की गई ही है।
कई परिवारों के पास पुश्तैनी कृषि भूमि कम है और परिवार बढ़ने के कारण उन्होंने आजीविका के लिए वन भूमि पर कब्जा किया है। इसके अलावा भी कई किसानों ने नोतोड़ की अर्जी दी, जो मंजूर नहीं हुई। बंदोबस्त में मिसल कब्जा मौका बनी परंतु उन्हें पट्टा नहीं मिल पाया। गुमान सिंह ने कहा कि अनुसूचित जाति व परंपरागत अन्य वनवासी को भी सरकार वन भूमि पर कब्जा करने वालों को नोटिस नहीं दे सकती है।
हिमाचल प्रदेश के अधिकतर किसान इस कानून के तहत आते हैं क्योंकि इनके परिवार इस क्षेत्र में वर्ष 1930 से पहले से रहते आए हैं। इस कानून के तहत किसान आजीविका के लिए वन भूमि पर कब्जा कर सकता है। इन सारी कानूनी परिस्थितियों व प्रदेश के 3 लाख 50 हजार परिवारों के हितों को देखते हुए सरकार नाजायज कब्जा हटाओ अभियान को तुरंत बंद किया जाए व वन अधिकार कानून 2006 लागू करके वन अधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया पूरी की जाए।
गुमान सिंह, प्रदेश संयोजद्म हिमालयन नीति अभियान समिति










