40 ग्राम की आकर्षक साड़ी
भोपाल. मौसम में आए बदलाव के चलते गौहर महल में चल रहे कतान सिल्क स्प्लेंडर मेले की रौनक ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पिछले दो दिनों से लोग बड़ी तादाद में मेले में पहुंच रहे हैं। शादियों का सीजन होने के कारण खासतौर पर साड़ियां और ड्रेस मेटरियल पसंद किए जा रहे हैं।
सिल्क की विभिन्न वैरायटी और उत्पादों की वजह से सिल्क मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सिल्क के शौकीन यहां अपनी पसंद और टेस्ट के हिसाब से मटेरियल पसंद कर रहे हैं। ४क् ग्राम से लेकर ६क् ग्राम तक की सिल्क साड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मेले में अब तक करीब 1६ लाख की बिक्री हो चुकी है जो आने वाले दिनों में और बढ़ने की उम्मीद है।
ये हैं ऑन डिमांडमेले में सबसे ज्यादा डियोपियान की डिमांड है। रॉ सिल्क से बना यह ड्रेस मटेरियल विभिन्न आकर्षक रंगों में उपलब्ध है। मोटा कपड़ा होने के कारण यह लोगों में ज्यादा पसंद किया जा रहा है। इसकी रेंज दो हजार से तीन हजार रुपए तक है।
उड़ीसा से आए विशेष सिल्क मटेरियल्स संबलपुरी साड़ी, बोनकई, कटकी और इकत साड़ी खासी पसंद की जा रही है। इनमें से इकत साड़ी को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
साउथ सिल्क में पोचमपल्ली लोगों को आकृष्ट कर रही है। शादी का सीजन होने के कारण वहीं बनारसी में जामवार सिल्क की साड़ी, ड्रेस मटेरियल और रेडीमेड सूट भी बेहद डिमांड में हैं।
सिल्क का गढ़ मध्यप्रदेश
मप्र सिल्क फेडरेशन के असिस्टेंट मैनेजर एसवी संत ने बताया कि मध्यप्रदेश सिल्क उत्पादन के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सिल्क कुल चार प्रकार की होती है। इनमें से तीन प्रकार की सिल्क का उत्पादन यहां बड़ी संख्या में होने लगा है।
चौथे प्रकार का सिल्क बनाने में कामयाबी मिल गई तो यह देश का पहला राज्य होगा जहां चारों प्रकार की सिल्क का उत्पादन होगा। फिलहाल होशंगाबाद, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, राजगढ़, विदिशा, रायसेन और गुना में मलबरी सिल्क, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, झाबुआ और बेतूल में एरी सिल्क और बालाघाट, होशंगाबाद में टसर सिल्क का उत्पादन हो रहा है।
महेश्वर, राजगढ़, बेतूल, छिंदवाड़ा और झाबुआ में बुनाई का काम किया जा रहा है। वहीं इंदौर, बाघ, उज्जैन और भैरोगढ़ में सिल्क की छपाई का काम चल रहा है।










