Friday, Nov 20th, 2009, 3:02 am [IST]  

danik bhaskarफर्जी सर्टिफिकेट देने वाला गिरफ्तार

संजीव महाजन

चंडीगढ़. शहर में चल रहे फर्जी इंस्टीटच्यूट और उनके स्टूडेंट्स को दिए जा रहे जाली सर्टिफिकेट बांटने वाले रैकेट का भांडाफोड हो चुका है। ‘भास्कर’ के खुलासे के बाद चंडीगढ़ पुलिस के स्पेशल इंवेस्टीगेशन सेल ने सेक्टर 46 मार्केट में चल रहे पांडे इंस्टीटच्यूट पर छापा मारा।

इंस्टीटच्यूट के संचालक अजय पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया। शुरूआती पूछताछ में पांडे ने पुलिस को बताया है कि वह तो प्यादा मात्र है। गिरोह के सरगना मोरिंडा और रोपड़ में हैं। उसने पुलिस को बताया कि वह इन लोगों से 16 हजार में 12वीं कक्षा के नकली सर्टिफिकेट बनवाता था। अभी तक उसने छात्रा दिव्या समेत कुल तीन फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवाएं है। इसके अलावा बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी,दिल्ली ने पुलिस को बताया है कि उनके बोर्ड के नाम से करीब 200 फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें उनके पास आ चुकी हैं। ये चंडीगढ़ और पंजाब के स्टूडेंट्स के बनाए गए हैं।



‘भास्कर’ ने 13 नवंबर के अंक में खुलासा किया था कि सेक्टर 47 में रहने वाली दीपिका ने सेक्टर -46 के एक इंस्टीट्यूट से 11वीं और 12वीं की। 12वीं में पास भी हो गई और पंचकूला के सरकारी कॉलेज में मास कम्युनिकेशन में दाखिला भी ले लिया। यहां तीन महीने पढ़ाई के बाद पता चला कि उसका 12वीं का सर्टिफिकेट नकली है। उसे कॉलेज से निकाल दिया गया है। दीपिका अकेली नहीं थी जो इस धांधली का शिकार हुई है। उसी की तरह 200 से ज्यादा विद्यार्थी फर्जी सर्टिफिकेट के जाल में फंसकर अपना वक्त और पैसा गंवा चुके हैं।



कुछ प्राइवेट इंस्टीटच्यूट भी फंसेंगे



छोटे छोटे कमरों में चल रहे करीब 23 प्राइवेट इंस्टीटच्यूट्स में यह धंधा पनप रहा है। ऐसे इंस्टीटच्यूट सीधे दसवीं और बारहवीं पास कराने का झांसा देते हैं। बच्चों को कोई रसीद नहीं दी जाती। पेपर के वक्त एक प्राइवेट स्कूल और उसके टीचर को हायर किया जाता है। पेपर भी बोर्ड की डेटशीट के मुताबिक करवाए जाते हैं ताकि किसी को रत्ती भर भी शक न हो। बाद में ये लोग खुद रिजल्ट तैयार करते हैं।



पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पास कराने के नाम पर भी पैसे ऐंठे जाते हैं। दीपिका के साथ भी ऐसा ही हुआ। पकड़े गए आरोपी अजय पांडे ने भी कबूला है कि वह अकेला नहीं है जो आरोपी गिरोह के संपर्क में है । उसने पुलिस को बताया है कि करीब बीस से ऊपर शहर के प्राइवेट इंस्टीटच्यूट संचालक भी इस फर्जी सर्टिफिकेट गिरोह के संपर्क में है।



कहीं खुद ही फंस न जाए



ऐसे इंस्टीटच्यूट की धोखाधड़ी का शिकार हुए विद्यार्थी कानूनी पंेच में फंस सकते हैं। अपने सर्टिफिकेट के नकली होने की जानकारी से अनजान ये विद्यार्थी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर अच्छे संस्थानों में दाखिला और नौकरी तक हासिल करने का प्रयास करते हैं।



यह बड़ा रैकेट है और अजय पांडे प्यादा मात्र है। अजय पांडे के जरिए हम गिरोह के सरगना तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल अजय को गिरफ्तार कर लिया गया है।



सतबीर सिंह, डीएसपी सीआईडी

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