अनुभव और जोश का तालमेल हो
भोपाल. राजधानी के प्रबुद्ध वर्ग की महिलाओं का मानना है कि महापौर और पार्षद शिक्षित-ईमानदार हो। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) और एशियन विकास बैंक (एडीबी) का काफी राशि भोपाल आ रही है, इसलिए महापौर ऐसा होना चाहिए, जिसकी फायनेंस के मामलों पर पकड़ हो और तकनीकी समझ भी हो।
तभी राशि के सही उपयोग पर वह फैसला ले सकेगा। दैनिक भास्कर के मेरा शहर मेरा वोट अभियान के तहत आयोजित समूह चर्चा में शहर की प्रमुख महिलाओं ने उक्त विचार व्यक्त किए।
इनका मानना है कि महापौर और पार्षदों को नगर निगम अधिनियम की समझ भी होना चाहिए। साथ ही वह प्रैक्टिकल भी हो। महापौर बनने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव नहीं आए और नागरिकों की समस्याएं जानने के लिए उसे उत्सुक रहना चाहिए।
लोगों की समस्याओं को जानने के लिए उन्हें कोई दिन या स्थान तय करना चाहिए, जहां लोग उनसे मिल सकें। बुजुर्ग महापौर या पार्षद होने पर वे जनता को ज्यादा समय नहीं दे सकेंगे।
उनका ज्यादा समय अपने आप को स्वस्थ बनाए रखने में जाया होगा। पार्षद तो युवा होना चाहिए, लेकिन महापौर के लिए अनुभवी व्यक्ति को चुना जाना चाहिए। पार्षद को चाहिए कि वह क्षेत्र की समस्याओं को जानने के लिए हाउसिंग सोसायटियों के अध्यक्षों से सतत संपर्क रखे।










