Friday, Nov 20th, 2009, 3:37 am [IST]  

danik bhaskarखेल के नाम पर हो रहा ‘खेल’

सुधीर उपाध्याय

aरायपुर. राज्य में खेल के नाम पर रकम खर्च तो बहुत हो रही है पर जो सलूक खिलाड़ियों के साथ हो रहा है वह भी किसी खेल से कम नहीं। हाल ही में उत्कृष्ठ खिलाड़ियों को सर्टिफिकेट बांटने नाम पर लाखों खर्च किए गए, लेकिन प्रदेश के होनहार खिलाड़ियों की सड़क हादसे में मौत पर परिजनों को मात्र 25-25 हजार रुपए देकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई जबकि घायलों को कुछ भी नहीं दिया गया।



प्रोत्साहन नियम 2005 में खिलाड़ियों के बीमा का प्रावधान है लेकिन इसकी राशि भी बहुत कम है। हाल ही में 2014 में संभावित नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए शासन ने 50 लाख रुपए का चेक जमा किया । खेल के जानकारों की माने तो आयोजन के नाम पर खर्च करना तो ठीक है लेकिन खिलाड़ियों के साथ भी इंसाफ होना चाहिए।



ऐसा नहीं होने पर हम उनसे पदक की उम्मीद नहीं कर सकते। केशकाल के पास सड़क हादसे में मारे गए और घायल हुए सभी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के दम पर राज्य स्तर के आयोजन में हिस्सा लेने जा रहे थे। उनके साथ ऐसा खिलवाड़ समझ से परे है।



70 प्रमाणपत्र बांटने किए लाखों खर्च : हाल ही में उत्कृष्ट खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट बांटने के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गए। किस तरह से पैसे की बर्बादी होती है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 10 से 15 रुपए प्रति सर्टिफिकेट को बांटने के लिए शहर के एक बड़े होटल में आयोजन किया गया।



जिसमें तीन सौ खिलाड़ियों को लगभग 350 प्रति प्लेट का खाना खिलाया गया। इसके अलावा भी अन्य खर्च किए गए। पूरे खर्च को देखा जाए तो यह लाखों में हैं।



दैनिक भत्ता नहीं : राज्य में होने वाले आयोजनों में खिलाड़ियों को डीए देने का प्रावधान नहीं। खेल के जानकारों ने बताया कि राज्य स्तर के आयोजन में उनके लिए 100 रुपए के खर्च पर नाश्ता, चाय और खाना की व्यवस्था की जाती है। जिला स्तर के खिलाड़ियों के लिए यही बजट 50 रुपए प्रति खिलाड़ी हो जाता है। यह दुबले पर दो आषाढ़ जैसा है।



खिलाड़ियों की कीमत सिर्फ 25 हजार : खेल के 20 बरसों के इतिहास में इस तरह की यह पहली घटना जब एक साथ चार खिलाड़ी मौत के घाट उतर गए। खिलाड़ियों की कीमत कितनी है, शासन ने उनकी मौत का मुआवजा देकर यह बात साबित कर दी है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न खेल संघ से जुड़े अधिकारियों में इस बात को लेकर काफी रोष है। उनका कहना है कि ऐसे में तो खिलाड़ियों से किसी भी प्रकार के पदक कि उम्मीद ही नहीं की जानी चाहिए, जब उनकी कीमत सिर्फ 25 हजार रुपए आंकी जाए।

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