Friday, Nov 20th, 2009, 3:46 am [IST]  

danik bhaskarनौकरी छोड़ देंगे पैसे दे देंगे, पर गांव नहीं जाएंगे

रोहित श्रीवास्तव

भोपाल. नए डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ करने का राज्य सरकार का प्रयास बेअसर साबित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ने और पूर्व में भरवाए गए बॉंड की रकम लौटाने को तैयार हैं।



इसका मुख्य कारण उन्हें प्राइवेट जॉब करने पर सरकारी नौकरी से तीन गुना ज्यादा वेतन मिलना है। प्रदेश में जिन 66 डॉक्टरों को पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ किया गया है, उनमें से एक दर्जन डॉक्टरों ने बॉंड की रकम लौटाने की पेशकश करते हुए सरकारी नौकरी ठुकराने का मन बना लिया है।



प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस, एमडी और एमएस करने वाले डॉक्टरों का ग्रामीण क्षेत्रों से मोहभंग होता जा रहा है। ऐसे डॉक्टरों की ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग की जा रही है लेकिन वे बॉंड की राशि जमा कर बॉंड समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।



जबकि चिकित्सा शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी बॉंड समाप्त न करने की जिद पर अड़ा हुआ है। विभाग ने बॉंड की राशि जमा कर बॉंड समाप्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।



दो दर्जन से ज्यादा एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों ने गांधी मेडिकल कॉलेज कार्यालय में बॉंड की राशि जमा कराने का आवेदन किया है। मार्च 2009 में जीएमसी से एमबीबीएस कर चुके डॉ. अविनाश ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश देते समय सामान्य श्रेणी के छात्रों को 75 हजार रुपए एवं आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए 40 हजार रुपए का बॉंड जमा कराने को कहा था।



इसमें डॉक्टरों को एक साल की सेवा ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में देने को कहा गया था। ऐसा न करने पर बॉंड की राशि संबंधित छात्र और उसके परिजनों से वसूलने का प्रावधान किया गया था।



उधर डॉ. पराग शर्मा ने मार्च 2009 में जीएमसी से एमबीबीएस डिग्री की है। इन्हें स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंद्रगढ़ जिला रतलाम में मेडिकल आफीसर के पद पर नियुक्ति दी है जबकि डॉ. शर्मा एमडी, एमएस कोर्स के लिए प्रीपीजी की तैयारी करना चाहते हैं।



सवा सौ में 66 को नियुक्ति
राज्य शासन ने गांधी मेडिकल कॉलेज से मार्च 2009 में एमबीबीएस करने वाले 140 डॉक्टरों में से केवल 66 के ही नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। जबकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमानुसार सभी एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को नियुक्ति आदेश शासन को जारी करने थे।



माह में केवल एक अवकाश
इन डॉक्टरों को महीने में केवल एक आकस्मिक अवकाश लेने की पात्रता दी गई है जबकि मेटरनिटी, मेडिकल सहित अन्य प्रकार के अवकाश की पात्रता न होना बताया गया है।



इसके साथ ही प्रत्येक डॉक्टर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखे गए मरीजों का प्रतिवेदन बनाने को कहा गया है। इस प्रतिवेदन को ब्लाक मेडिकल ऑफीसर कार्यालय में प्रत्येक माह की 5 तारीख तक जमा करानी होगी। तभी इन डॉक्टरों के वेतन का भुगतान किया जाएगा।





दो उदाहरण
डॉ. अविनाश ठाकुर ने बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें कोर्स पूरा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिन्दुआ जिला मंडला में पंद्रह हजार रुपए प्रतिमाह पर नियुक्ति दी है। जबकि मौलाना आजाद हास्पिटल नई दिल्ली से जुड़ी सुश्रत ट्रामा सेंटर नई दिल्ली में 43800 रुपए प्रतिमाह का जॉब आफर लेटर मिला है। इसके चलते वे बॉंड समाप्त करना चाहते हैं।



डॉ. पराग शर्मा को स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंद्रगढ़ (रतलाम) में मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्ति दी है। डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रीपीजी तैयारी के लिए कोचिंग जरूरी है और शासन गांव में ड्यूटी करने को बाध्य कर रहा है।

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