Friday, Nov 20th, 2009, 4:07 am [IST]  

danik bhaskar55 पुलिसवाले, 12 माह थाने पहुंचा एक मामला

महेश शर्मा

जयपुर. शहर के सभी प्रमुख स्मारकों पर आपराधिक तत्वों की फौज सैलानियों को परेशान करती है। इसके बावजूद पर्यटक पुलिस ने सैलानियों की सुरक्षा को लेकर इस पूरे साल में महज एक मामला माणकचौक थाने में दर्ज कराकर दिलेरी दिखाई है।



जंतर-मंतर पर एक सैलानी के सामान को छीनकर भाग रहे एक लपके को पकड़ने के बाद पर्यटक पुलिस ने लपके को माणकचौक पहुंचाकर मामला दर्ज कराया था। पूरे साल की इस उपलब्धि के बारे में डीबी स्टार ने पर्यटक पुलिस से ही इसका कारण जाना तो सभी ने एक स्वर में यही कहा, ‘किसके भरोसे पंगा लें, हम तो नाम की पुलिस हैं। हमारे पास न तो कोई पावर है और न ही कोई कानून।’



पिछली गहलोत सरकार में गठित हुई पर्यटक पुलिस आज भी अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। गोल्डन ट्रायंगल का मजबूत हिस्सा होने के कारण जयपुर में सैलानियों की सुरक्षा और सहूलियत के लिए अलग से पर्यटक पुलिस की योजना साकार की गई।



असली पुलिस की तरह ही उनकी खाकी वर्दी, हाथ में डंडा और स्मारकों के आसपास बैठने की जगह ने इस उद्योग से जुड़े लोगों को बड़ी राहत प्रदान की। चंद दिनों तक तो पर्यटक पुलिस के डंडे ने अपना रौब दिखाया, लेकिन पुलिसिया पावर के अभाव में अब लपकों ने ही इन्हें आंख दिखाना शुरू कर दिया।



कमाल की बात तो पिछले दिनों हुई जब आमेर महल के नीचे एक लपके की हरकतों से परेशान पैलेस ऑन व्हील्स के आला अफसर ने लपके को थप्पड़ रसीद कर दिया। पर्यटक पुलिस के जवानों की मदद से लपके को आमेर थाने ले जाया गया तो थाने के पुलिसवालों ने ही मामले से पल्ला झाड़ दिया। थाने से ‘बाइज्जत’ लौटने के बाद तो लपकों की पूरी फौज ने पर्यटक पुलिस और आला अफसर को घेर लिया और थप्पड़ मारने वाले अधिकारी से माफी मंगवाने पर ही रास्ता छोड़ा।



इस तरह के एक नहीं बल्कि कई मामले सामने आते हैं, जब अपराधियों के आगे पर्यटन पुलिस को नतमस्तक होना पड़ता है। ऐसे में स्मारकों पर उनकी उपस्थिति का असर सहज ही जाना जा सकता है। टैफ (टूरिस्ट असिस्टेंट फोर्स) के एक जवान नाम नहीं छापने की शर्त पर अपनी व्यथा बताते हैं कि अब तो हमारी कमजोरी का फायदा उठाकर लपके हम पर हावी हो जाते हैं। इसकी शिकायत थाने में करते हैं तो हमारे ही आला अफसर पंगा नहीं लेने की बात कह देते हैं।



जिम्मेदारों से सवाल किए तो एक-दूसरे पर टालते रहे



डीवाइएसपी और डिप्टी डायरेक्टर (टैफ)

शालिनी सक्सेना से सीधी बात



पर्यटक पुलिस के गठन के 8 साल बाद भी कोई कानून नहीं बना, क्यों?

देखिए, इस मामले में कोई भी बात हमारे स्पोक्स पर्सन विनोद अजमेरा करेंगे।



लेकिन टैफ का कंट्रोल तो आपके पास है?

मैं आपको इतना बता सकती हूं कि पर्यटन पुलिस के लिए अलग से थाने बनाकर उन्हें पावर दी जानी चाहिए। इसके लिए अलग से कानून बनाए जाने की जरूरत है, ताकि ये बखूबी अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें। इस बारे में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी नहीं।



अतिरिक्त निदेशक विनोद अजमेरा से सवाल



पर्यटक पुलिस के लिए किस तरह का कानून लाया जा रहा है?

-अभी किसी तरह का कोई कानून या पावर देने की बात नहीं है। वैसे इसकी जानकारी शालिनी सक्सेना देंगी, वही पर्यटन पुलिस का काम देखती हैं।



उनका (शालिनी सक्सेना) कहना है कि इस बारे में आप ही बताएंगे?

यह क्या बात हुई? टैफ के बारे में तो वही बताएंगी, हर जानकारी मेरे पास थोड़े ही है। वे पर्यटक पुलिस के लिए ही हैं।

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