रोडवेज में ड्रेस कोड की अनदेखी
पानीपत. परिवहन विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हर साल वर्दी और जूते पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। परंतु तीन साल बाद बाद भी नए ड्रेस कोड के अनुसार किसी भी अधिकारी और कर्मचारी के तन पर वर्दी नहीं है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्दी के प्रति अनदेखी यहीं खत्म नहीं होती। कई अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ड्रेस तक की सही जानकारी नहीं है। अधिकारियों की कार्रवाई डिपो स्तर पर ऐसे कर्मचारियों पर जुर्माना लगाने के पत्र भेजने तक ही सिमट कर रह जाती है।
तीन साल पहले बदला ड्रेस
प्रदेश सरकार ने रोडवेज कर्मियों की अलग पहचान बनाने के लिए तीन वर्ष पूर्व नए रंग का ड्रेस कोड लागू किया। तत्कालीन परिवहन मंत्री रणदीप सिंह सूरजेवाला ने रोडवेज कर्मियों की मीडियम ब्लू शर्ट, डार्क ग्रे रंग की पैंट निर्धारित की थी।
सरकार और विभागीय अधिकारियों के बीच में आनाकानी के चलते डिपो स्तर पर पहले दो साल कपड़ा नहीं पहुंच पाया। सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को नकद राशि देकर वर्दी सिलवाने का फैसला लिया। गत वर्ष कर्मचारियों को नई वर्दी का कपड़ा दे दिया गया।
बैज और नेम प्लेट भूले
रोडवेज कर्मियों को वर्दी पहनने के अलावा नेम प्लेट और शोल्डर बैज भी लगाना होता है। विभाग द्वारा वर्दी के साथ कर्मी को ये सब चीजे देनी होती हैं। नेम प्लेट और शोल्डर बैज लगाना कर्मचारी तो भूल ही गए हैं, साथ में अधिकारी भी इसको डिपो स्तर पर देने से बच रहे हैं।
शायद ही किसी डिपो पर नेम प्लेट और शोल्डर बैज उपलब्ध हों। सही मायनों में देखा जाए तो रोडवेजकर्मियों को नेम प्लेट और शोल्डर बैज लगाने के विषय में सही से जानकारी तक नहीं है। नेम प्लेट पर अधिकारी या कर्मचारी का पद और संख्या के साथ नाम लिखा होता है। शोल्डर बैज पर हरियाणा रोडवेज का बैज होता है।
डकार गए वर्दी का पैसा!
रोडवेज कर्मियों को वर्ष में दो बार ठंडी और तीन साल में एक बार गर्म वर्दी मिलती है। नए ड्रेस कोड के अनुसार दोनों ठंडी वर्दी पर 800 रुपए और जूतों पर 600 रुपए प्रति कर्मचारी खर्च होता है। पूरे प्रदेश में करीब 18 हजार कर्मचारी हैं।
इस हिसाब से रोडवेज ड्रेस पर ही करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च करता है। गत दिनों वर्दी का कपड़ा न मिलने पर कर्मचारियों को वर्दी की नकद राशि दी गई। लेकिन रोडवेज कर्मचारियों ने राशि से वर्दी सिलवाने की बजाय उसे अपने पास ही रख लिया।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया
कर्मचारियों की इस साल की वर्दी डिपो स्तर पर पहुंच गई है। जल्द ही कर्मचारियों को वर्दी दे दी जाएगी। कर्मचारियों को वर्दी सिलवाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। इसके पश्चात वर्दी न पहनने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - आनंद मोहन शरण, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, परिवहन विभाग, चंडीगढ़










