एक और कोशिश-शीतल-श्वेता बने हमसफर
रतलाम. जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी, बात कुछ बन ही गई.. गीत की तरह ही मूकबधिर शीतल प्रजापति (23) व श्वेता कसेरा (20) की बात भी परिणय बंधन में बंधकर आखिरकार बन ही गई।
1972 में बोल व सुन नहीं सकने वाले नायक-नायिका के वैवाहिक जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘कोशिश’ की तरह ही गुरुवार को शीतल व श्वेता ने सात फेरे लेकर जिंदगी के कठिनतम सफर पर साथ-साथ कदम बढ़ाए।
दूल्हा-दुल्हन के रूप में स्टेज पर बैठे दोनों के चेहरों पर छाई मुस्कान उनके दिलों का हाल बयां कर रही थीं। परिचितों का खुशगवार अंदाज में स्वागत करते हुए शिक्षकों सहित बड़े-बुजुर्गो से आशीर्वाद लिया तो हमउम्र को गले लगाया।
रंग लाई जनचेतना परिषद की कोशिश- शीतल व श्वेता की यह अनूठी शादी जनचेतना परिषद कोशिश का नतीजा है। दोनों ने संस्था द्वारा संचालित मंदबुद्धि-मूकबधिर विद्यालय में ही प्रारंभिक शिक्षा हासिल की है।
विवाह को लेकर परिजन तेजराम प्रजापति व राधेश्याम कसेरा काफी परेशान थे। सामाजिक सीमाओं में बंधे परिजन की परेशानी को भांपते हुए जनचेतना परिषद ने दोनों परिवारों को समझाया। उनकी कोशिश रंग लाई और दोनों परिवार शादी को तैयार हो गए।
गुरुवार को जब दोनों का विवाह हुआ तो सारा रतलाम गवाह बना। प्राचार्य सतीश तिवारी ने बताया प्रारंभ से ही दोनों मेहनती व पढ़ने में अव्वल रहे हैं। हमारी छोटी-सी कोशिश से दोनों का जीवन संवर गया हमारे लिए यही बहुत है।
खुद के पैरों पर खड़े हैं शीतल-आठवीं तक शिक्षित शीतल अपने पैरों पर खड़े हैं। अलकापुरी चौराहे पर एसटीडी चलाने के साथ-साथ पिता के व्यवसाय में भी हाथ बंटाते हैं।










